सांबा। भारत पाकिस्तान सीमा पर शांति के प्रतीक के रूप में लगने वाले बाबा चमलियाल की दरगाह पर कई वर्षों से आयोजित हो रहे मेले में इस बार हर साल जैसी रौनक नहीं दिखी है। एलओसी और सीमा पर तनाव के माहौल के बीच सालों से चली आ रही परंपरा और भीड़ इस बार नहीं दिखी। इस मेले में हर साल पाकिस्तान रेंजर्स के तमाम अधिकारियों समेत उनके परिवार के लोग आते थे पर इस बार ऐसा नहीं है। दो देशों के बीच तनाव का असर मेले में दिखा है। हर बार पाक रेंजर्स के अधिकारियों द्वारा मेले में बीएसएफ के जवानों के साथ तोहफों का आदान प्रदान होता था, तनाव भूलकर बातचीत भी की जाती थी पर इस बार ऐसा नहीं दिखे। मेले में तोहफे तो दिए गए लेकिन दिलों से बातचीत नहीं हुई। वहीं पहले पाक अधिकारी मजार पर चढ़ाने के लिए लाई जाने वाली चादर को भारतीय मीडिया के सामने लाते थे लेकिन इस बार जीरो लाइन से ही चादर को पैक कर बीएसएफ के अधिकारियों को दे दी गई।