राजस्थान में गुरुवार को वट अमावस्या पर बृहस्पतिवार को महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा की और सौभाग्य की कामना की। राजधानी जयपुर में चारदीवारी में कई जगहों पर यह पूजा की गई। इस मौके पर वट सावित्री की कथा पढ़कर महिलाओं ने अपने सुहाग की लम्बी उम्र की कामना की। कथा समाप्ति पर बगरद के पत्तों के गहने बनाकर धारण भी किए।
जानकार बताते हैं कि ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या के दिन वट यानी बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है। इस व्रत को स्त्रियां अखंड सौभाग्यवती रहने की मंगलकामना से करती हैं। प्राचीन काल से चली आ रही परंपरा के अनुसार अपने पति के दीर्घायु होने के लिए स्त्रियां बरगद के पेड़ की पूजा और व्रत करती हैं। पद्म पूरण के अनुसार वट वृक्ष की जड़ों में ब्रह्मा जी, तने में विष्णु और डालियों एवं पत्तों में शिव का वास है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन व्रत रखकर वट वृक्ष के नीचे सावित्री, सत्यवान और यमराज की पूजा करने से पति की आयु लंबी होती है और संतान सुख की प्राप्ति होती है।