राजस्थान हाईकोर्ट ने पूछा है कि काउंटर से टिकट लेने के बाद उसके कैंसिल होने की स्थिति में रिफंड का भुगतान स्वत: ही ऑनलाइन क्यों नहीं हो रहा है। इस सम्बंध में रेलवे चैयरमेन, रेलवे सचिव और उत्तर-पश्चिम रेलवे के जीएम को नोटिस जारी किए गए हैं।
मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नान्द्रजोग और न्यायाधीश वीके व्यास की खंडपीठ ने यह आदेश सुजीत स्वामी की ओर से दायर जनहित याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता साजिद अली ने बताया कि रेलवे का यात्रा टिकट ऑनलाइन खरीदने के बाद यदि रिजर्वेशन नहीं मिलता तो टिकट स्वत: ही रद्द होकर संबंधित व्यक्ति को ऑनलाइन भुगतान प्राप्त हो जाता है। वहीं यदि किसी यात्री ने टिकट काउन्टर से टिकट लिया है तो रिजर्वेशन नहीं मिलने की स्थिति में टिकट स्वत: ही रद्द नहीं होता, बल्कि यात्री को यात्रा से आधा घंटा पूर्व काउंटर पर जाकर टिकट रद्द करवाकर रिफंड लेना पड़ता है। यदि तय समय तक यात्री नहीं पहुंचता है तो रेलवे उसकी टिकट राशि को जब्त कर लेता है। याचिका में कहा गया कि सूचना के अधिकार से मिली जानकारी के तहत वर्ष 2014 से 2016 तक रेलवे ने इस तरह बिना यात्रा कराए करीब पन्द्रह सौ करोड़ रुपए सालाना कमाए हैं।
याचिका में गुहार की गई है कि रिजर्वेशन फॉर्म में यात्री के बैंक खाते और संबंधित बैंक शाखा की जानकारी ली जानी चाहिए। जिससे रिजर्वेशन नहीं मिलने पर टिकट स्वत: ही रद्द होकर यात्री को ऑनलाइन भुगतान प्राप्त हो जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।