राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को शपथ पत्र पेश कर बताने को कहा है कि बच्चों में कुपोषण नापने के लिए किन-किन स्वास्थ्य उपकेन्द्रों और आगंनबाड़ी में एमयूएसी टेप काम में लिया जा रहा है। अदालत ने शपथ पत्र पेश करने के लिए राज्य सरकार को 12 मार्च का समय दिया है।
न्यायाधीश केएस झवेरी और न्यायाधीश वीके व्यास की खंडपीठ ने यह आदेश अधिवक्ता महेश शर्मा की ओर से दायर जनहित याचिका पर दिए। सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार के अधिवक्ता से पूछा कि प्रदेश में बच्चों की जनसंख्या कितनी है और उनमें कितने प्रतिशत बच्चों को कुपोषण है? सरकारी अधिवक्ता के जवाब नहीं देने पर अदालत ने बताया कि प्रदेश में करीब चालीस फीसदी जनसंख्या बच्चों की है। इनमें से करीब 28 फीसदी बच्चे कुपोषण का शिकार हैं।
अदालत ने यह भी बताया कि देशभर में कुपोषित बच्चों के मामले में प्रदेश पहले स्थान पर है। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि यूनिसेफ ने छह माह से पांच साल तक के बच्चों के पोषण की जांच के लिए एमयूएसी टेप की अनुशंषा की है। इस उपकरण को बच्चे की बांह पर बांधकर पोषण की जांच की जाती है, लेकिन राज्य के किसी भी अस्पताल में यह उपकरण ही उपलब्ध नहीं है।
इस पर अदालत ने राज्य सरकार को शपथ पत्र पेश कर जानकारी देने को कहा है कि कुपोषण नापने के लिए किन केन्द्रों में एमयूएसी टेप का उपयोग हो रहा है।