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एक था राजस्थान का टाइगर जिसने यूं ली थी पाकिस्तानी सेना में एंट्री और बन गए थे मेजर

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रविन्द्र कौशिक का फाइल फोटो - फोटो : Internet
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पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव पर लगे जासूसी के आरोप को पाकिस्तान अभी तक साबित ना कर पाया हो मगर देश के दुश्मनों के बारे में खतरा उठाकर जासूसी करना इतना आसान नहीं है। बॉलीवुड की फिल्मों में जिस तरह से पर्दे पर जासूसों को दर्शाया जाता है उससे भी ज्यादा उलट एक सच्चे जासूस की कहानी हम आपको सुनाते हैं। 
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आमतौर पर सुना जाता है कि रॉ एजेंट्स और उनके कारनामों के बारे में ज्यादा जानकारियां आम लोगों के बीच साझा नहीं की जाती है, लेकिन हम आपको एक ऐसे जांबाज और शातिर जासूस की कहानी बता रहे हैं, जिसने अपना पूरा जीवन देश सेवा को समर्पित करते हुए पाकिस्तान की जेलों में तड़पते हुए बिता दिया।

1979 से 1983 के बीच रविन्द्र ने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को पाकिस्तानी सेना से जुड़ी अहम जानकारियां सौंपी जो देश के लिए काफी मददगार साबित हुई। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने कौशिक को 'ब्लैक टाइगर' नाम दिया और उस समय भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी कौशिक को ब्लैक टाइगर के नाम से ही पुकारती थीं।
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रविन्द्र कौशिक उर्फ नबी अहमद को भारत का अब तक का सबसे जांबाज और शातिर अंडर कवर एजेंट माना जाता है। रविन्द्र न सिर्फ पाकिस्तानी सेना में शामिल हुए बल्कि तरक्की पाते हुए मेजर की रैंक भी नसीब हो गई। उसी दौरान रविन्द्र को इस्लाम कबूल करना पड़ा और उन्होनें वहां अमानत नाम की एक लड़की से निकाह भी किया, जिससे उन्हें एक बेटा हुआ।

रविन्द्र स्टेज आर्टिस्ट से यूं बने मेजर नबी अहमद

फाइल फोटो - फोटो : Internet
रविन्द्र कौशिक का जन्म 1952 में राजस्थान के श्री गंगानगर जिले एक पंजाबी परिवार में हुआ था। अपनी किशोरावस्था रविन्द्र का झुकाव नाटकों की तरफ हो गया था। भारतीय खुफिया एजेंसी 'रॉ' के कुछ अधिकारियों ने रविन्द्र को मंच पर एक नाटक के दौरान देखा और उनकी एक्टिंग के मुरीद हो गए।

उस दौरान रविन्द्र कौशिक को राष्ट्रीय स्तर के नाट्य कलाकार के रूप में पहचान मिल चुकि थी लेकिन दुश्मनों की हरकतों पर नजर रखने वाली भारतीय खुफिया एजेंसी की नजरे इस 23 साल के युवा पर थी। आखिरकार अपनी पढ़ाई पूरी कर लेने के बाद कौशिक ने 'रॉ' ज्वाइन कर लिया जिसके बाद उनका पूरा जीवन ही बदल गया।

23 साल की उम्र में भारतीय अंडर कवर एजेंट बने रविन्द्र कौशिक को दिल्ली में ट्रेनिंग दी गई थी। दिल्ली में ट्रेनिंग के दौरान रविन्द्र ने उर्दू और इस्लामिक शब्दों को लिखना और पहचानना सीखा। 1975 में पाकिस्तान भेजे जाने से पहले रविन्द्र से जुड़े सभी दस्तावेजों और जानकारियों को एजेंसी द्वारा नष्ट कर दिया गया था और उनके परिवार से भी जुड़ी जानकारी छुपा दी गई थी।

पाकिस्तान पहुंचते ही वो रविन्द्र कौशिक से नबी अहमद हो गए और कराची विश्वविद्यालय से वकालत की पढ़ाई पूरी की। वकालत पूरी हो जाने के बाद रविन्द्र पाकिस्तानी सेना में शामिल हो गए और वहां से शुरू रविन्द्र को असली जीवन में एक नया किरदार निभाने का मौका मिला।
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दयनीय रहा पाक जेलों में जिंदगी का सफर

फाइल फोटो - फोटो : Internet
पाकिस्तान के माहौल में अच्छे खासे ढल चुके रविन्द्र उर्फ नबी अहमद के राज से आखिरकार उस समय पर्दा उठा जब रॉ ने रविन्द्र के पास भारत से एक और जासूस को रहने के लिए भेजा जिसे बाद में पाकिस्तानी इंटेलिजेंस एजेंसियों ने धर लिया। इसके बाद रविन्द्र को भी गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें सजा-ए-मौत सुनाई गई, जिसे बाद में आजीवन कारावास की सजा में तब्दील कर दिया गया।

इस दरम्यिान ही रविन्द्र को टीबी और दिल की बीमारी हो गई और उनका मुल्तान की सेंट्रल जेल में निधन हो गया। भारत के ब्लैक टाइगर को पाकिस्तानी की जेलों में करीब दो सालों तक खूब टॉर्चर किया गया था और बहुत ही दयनीय हालत में उन्हें पाकिस्तानी की जेलों में रखा जाता था।
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