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इस गांव में लोग श्मशान में तलाशते हैं सुकून...जानिए क्यों

Thu, 18 May 2017 04:28 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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गांव में श्रमदान करते लोग - फोटो : अमर उजाला
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सीकर में एक गांव ऐसा है, जिसके अधिकतर लोग रोज श्मशान जाते हैं, कुछ देर वहां बिताते हैं और घर लौट आते हैं। लोग कहते हैं कि वहां उन्हें अलग तरह का सुकून मिलता है।
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दरअसल वे इस श्मशान में सुबह और शाम को सैर करने जाते हैं। गांव में कोई ऐसी जगह नहीं थी जहां वे हरियाली के बीच धूम सकें। ऐसे में गांव के लोगों ने मिलजुलकर श्मशान को ही गार्डन की सूरत दे दी। अब ये मोक्षधाम कम और गार्डन ज्यादा लगता है। यहां दिन में जहां लोग दाह संस्कार के लिए आते हैं, वहीं अलसुबह सैर करने और सेहत बनाने आने वालों की भी कमी नहीं रहती। इस पूरी मुहिम को एक रिटायर्ड फौजी ने शुरू किया था। आठ साल लग गए उसे बदलने में, लेकिन अब ये श्मशान किसी चमन सा सूकुन देता है।

ये किस्सा सीकर के कंवरपुरा का है। गांव में सर्व समाज का मोक्षधान है। ऐसा मोक्ष धाम जहां लोग दाह संस्कार के लिए कभी कभी आएं पर धूमने के लिहाज से रोज सुबह शाम आते हैं। यहां हरियाली लोगों को अपने आप खींच लाती है। करीब आठ सौ छायादार पेड़ है।
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आठ साल पहले गांव में रहने वाले रिटायर्ड फौजी जगनसिंह व गिरधारी बिजारणियां ने मोक्षधान को हरा भरा बनाने का सपना देखा। उन्होंने अपनी कोशिश शुरू की तो उनके साथ गांव के ही रहने वाले लोग जुड़ने लगे। लोग सुबह शाम श्रमदान करने आते। देखते ही देखते श्मशान गार्डन की सूरत लेने लगा। लोगों ने मिलकर ही वहां एक चौबारा भी बना दिया। श्रमदान का ये सिलसिला बदस्तूर अब भी जारी है।
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तकनीक से गुलजार किया श्मशान

यूं बदली श्मशान की सूरत - फोटो : अमर उजाला
इस गार्डन को तैयार करने में तकनीक का भी उपयोग लिया गया है। मोक्षधाम में हजारों की तादाद में छोटे बड़े पेड़ पौधे लगे है। पौधों में ड्रिप से पानी दिया जाता है। यहां ग्रामीणों ने एक बोरिंग व पानी की टंकी करवाई है। ऐसे में पानी की माकूल व्यवस्था रहती है।

इस गार्डन की सूरत बदलने वालों में सुरजन सिंह, रामचंद्र, रामदयाल बिजारणिंया, गोपाल खंडेलवाल के नाम भी शामिल हैं। लोगों ने इस श्मशान के लिए चंदा करके बीस लाख रुपए की बड़ी राशि भी एकत्रित कर ली। पैसा कहां और कितना खर्च हुआ पाई पाई का हिसाब रखा जाता है।

मोक्षधाम के चारों तरफ दीवारी बना दीगई है। चौकीदार रखा गया है, जो पेड़ों और मोक्षधाम की रखवाली करता है। उसे गांव वाले मिलकर वेतन भी देते हैं। अब इस गार्डन में अब जल्द ही झूले लगाए जाएंगे  भगवान पशुपति नाथ का मंदिर भी बनाया। युवा दौड़ की प्रैक्टिस कर सकें, इसके लिए एक ट्रेक भी बनाया जाएगा।
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