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पीपे में आत्मा बंद करने के लिए अस्पताल के आईसीयू में किया तंत्र-मंत्र, सहम गए मरीज

Sat, 24 Jun 2017 02:40 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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एमबीएस अस्पताल, कोटा - फोटो : amar ujala
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राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में मृतकों की आत्माएं भटक रही हैं और लोग इन्हें वहां से ले जाने के लिए तरह-तरह के जतन करते है। इससे मरीजों की जान पर बन आती है, लेकिन जिम्मेदार इस अंधविश्वास को रोकने की बजाय आंखें मूंद बैठे हैं। ताजा मामला कोटा के एमबीएस अस्पताल का है।
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दरअसल,प्रदेश के कई ग्रामीण इलाकों में अंधविश्वास है कि किसी शख्स की मौत यदि अस्पताल में हो जाए तो उसकी आत्मा वहीं भटकती रहती है। इससे घर में अशांति का माहौल रहता है और वे सुख-चैन से नहीं रह पाते। 

इस अंधविश्वास के चलते कोटा के सरकारी अस्पताल में आज सुबह कुछ लोग आईसीयू तक पहुंच गए। उन्होंने वहां आत्मा को बुलाने के लिए पूजा-पाठ की और इस दौरान वहां भर्ती मरीजों की जान को जोखिम में डालते हुए दीपक जलाया। 
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यह टोना-टोटका सांवर गांव के परिवार के लोगों ने किया। इससे डरे मरीज और उनके परिजन घबरा गए और बाहर जाने लगे। बड़ी बात यह रही कि शिकायत के बाद भी अस्पतला प्रशासन इस मामले में आंखें मूंदे रहा। उलटा ये कहकर पल्ला झाड़ दिया कि उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं है।
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दो साल से भटक रही आत्मा को लेने आए थे ये लोग

एमबीएस अस्पताल, कोटा - फोटो : amar ujala
सांवर गांव के लोग दो साल पहले इस अस्पताल में ही मरे उनके परिचित की आत्मा को लेने आए थे। इनका कहना था कि परिवार के एक सदस्य की मौत दो साल पहले एमबीएस अस्पताल में हुई थी। उसकी आत्मा को लेने के लिए यह परिवार अस्पताल में आया था। 

अस्पताल में टोने-टोटके का यह ड्रामा काफी देर तक चलता रहा। यह लोग टोटका कर आत्मा को पीपे में बंद कर अपने साथ ले जाना चाहते थे। इनकी ये बातें सुनकर अस्पताल में मौजूद किसी व्यक्ति को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि यह सब क्या हो रहा है। ना तो किसी डाॅक्टर ने इन्हें रोकने की कोशिश की और ना ही वहा तैनात किसी गार्ड ने। 

वहां मौजूद कई लोग इनकी कारस्तानी को कैमरे में कैद करने लगे और मीडिया को इसकी जानकारी लगने पर ये सभी लोग धीरे-धीरे वहां से खिसकते नजर आए।

हालांकि, बाद में जब मीडिया ने अस्पताल प्रशासन से इस बारे में बात की तो उन्होंने भी इसे गंभीर माना और इसकी पुनरावृत्ति नो हो इसके लिए सुरक्षा गार्ड और वार्ड इंचार्ज को पाबंद किया। गौरतलब है कि भीलवाड़ा के महात्मा गांधी सरकारी अस्पताल में भी इस तरह के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं।
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