दम्य साहस व वीरता के प्रदर्शन के लिए रतन कुमार सेन को 26 जनवरी 1995 को राष्ट्रपति की ओर से शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था। चिकित्सकीय संबंधी दिक्कतों के चलते वह साल 1997 में 46 साल की उम्र में सेना से समय पूर्व सेवानिवृत्ति हो गए थे।
शौर्य चक्र विजेता लेफ्टिनेंट कर्नल सेवानिवृत्त रतन कुमार सेन का शुक्रवार को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। परिवारजनों ने सेन का पार्थिव शरीर चिकित्सकीय उद्देश्य के लिए दान किया है। परिवार की ओर से जारी बयान के अनुसार सेन को मिशन कपाउंड में अंतिम विदाई दी गई। इसके बाद सैन्य वाहन में उनके पार्थिक शरीर को देहदान के लिए जेएनयू मेडिकल कॉलेज ले जाया गया।
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लेफ्टिनेंट कर्नल सेन (70) का शुक्रवार को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके परिवार में पत्नी, दो बेटियां व अन्य सदस्य हैं। सेन 1994 में राष्ट्रीय राइफल्स के हिस्से के रूप में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान के लिए तैनात थे। इसी दौरान 17 मार्च 1994 को अनंतनाग जिले में आतंकवादियों ने उनपर हमला कर दिया था। एक आतंकी ने उनके सिर में गोली मार दी थी।
बुरी तरह घायल होने के बावजूद रतन कुमार सेन लड़ते रहे और अनेक जिंदगियां बचाईं। अदम्य साहस व वीरता के प्रदर्शन के लिए रतन कुमार सेन को 26 जनवरी 1995 को राष्ट्रपति की ओर से शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था। चिकित्सकीय संबंधी दिक्कतों के चलते वह साल 1997 में 46 साल की उम्र में सेना से समय पूर्व सेवानिवृत्ति हो गए थे। उसके बाद वह समाज सेवा में संलग्न रहे थे।