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टीकाकरणः अभियान पर भारी पड़ी अफवाह, प्रभावित हो गए 90 गांव

Fri, 12 May 2017 01:17 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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फाइल फोटो।
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सरकार व स्वास्थ्य विभाग के तमाम प्रयासों के बाद भी अलवर जिले के 90 गांव ऐसे है जहां टीकाकरण कार्यक्रम प्रभावित हुआ है। इसका प्रमुख कारण है करीब दो माह पूर्व इस क्षेत्र में फैली एक अफवाह फैली थी कि टीकाकरण के माध्यम से मेव समुदाय के बच्चों को नपुंसक बनाया जा रहा है।
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मेव समाज में ये अफवाह दो महीने पहले से फैली हुई है। इस अफवाह के बाद से ही विशेष रूप से इस समुदाय के लोगों ने बच्चों को टीका लगवाना ही बंद कर दिया है। सरकार की ओर से नियमित रूप से टीकाकरण किया जा रहा है, लेकिन इस समुदाय के लोग अभी भी टीके नहीं लगवा रहें हैं। जिले में टीकाकरण अभियान से जुड़े अधिकारी बताते है कि इन लोगों को समझाइश के लिए कम्यूनिटी स्तर पर काफी प्रयास किया जा रहा है। लेकिन ये सभी प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं।

टीकाकरण से नपुंसक बनाने की अफवाह के बाद अलवर के साथ भरतपुर जिले में टीकाकरण कार्यक्रम पर असर दिखा था। वहीं चिकित्सा अधिकारी दबी जुबां में इसके लिए सोशल मीडिया को दोषी मानते है। हरियाणा व राजस्थान बॉर्डर से लगते कई गांवों में टीकाकरण केवल 13 फीसदी ही हो सका है। 
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30 फीसदी लोग नहीं आते

अलवर जिले के जो 90 गांव इस अफवाह से प्रभावित हुए थे उनमें अधिकतर गांव रामगढ़, तिजारा व लक्ष्मणगढ़ ब्लॉक है। इन सभी गांव की कुल आबादी करीब 48 हजाार है। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इसमें से 30 फीसदी लोग ऐसे है जिनके बच्चों के टीके नहीं लगे है। इनमें अधिकतर लोग मेव समुदाय से सबंध रखते है। अधिकारी बताते है घर—घर जाकर भी टीके लगाने के प्रयास किए गए है लेकिन जवाब नकारात्मक ही रहा है। 

नौ टीके लगाए जाते है

छह वर्ष तक के बच्चों को विभिन्न बीमारियों से बचाने के लिए नौ प्रकार के टीके लगाए जाते है। समझाइश के बाद इस समुदाय के लोग एक—दो टीके तो लगवा लेते है लेकिन अगली बार टीके लगवाने नहीं आते। जो कि विभागीय अधिकारियों के लिए चुनौती बना हुआ है। वहीं इन गांवों में नुक्कड़ नाटक व जनप्रतिनिधियों के माध्यम से भी समझाइश व जागरुकता का प्रयास किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त जयपुर से भी कार्यक्रम की मॉनिटरिंग की जा रही है लेकिन समस्या सुलझती नहीं दिखाई दे रही है। 

प्रयास किए जा रहें है

'जो 90 गांव इस अफवाह से सबसे अधिक प्रभावित हुए है उनमें जागरुकता लाने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व एएनएम से भी कहा गया है कि किस गांव में कितने बच्चे इसके आंकड़ें पुन: तैयार किए जाए। जिससे कि सही स्थिति का पता लग सके।'
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ओ पी मीणा, आरसीएचओ, अलवर
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