राजस्थान हाईकोर्ट ने रामरहीम के डेरे से गायब होने वाली विवाहिता के मामले में लचर जांच करने पर नाराजगी जताई है। अदालत ने पेश हुए जवाहर सर्किल थानाधिकारी को कहा कि यदि उनसे जांच नहीं हो रही है तो क्यों ना पुलिस कमिश्नर से जांच करा ली जाए।
इसके साथ ही अदालत ने आश्रम के पदाधिकारियों के बयान दर्ज करने और संबंधित व्यक्तियों की कॉल डिटेल की जांच कर 7 दिसंबर को जांच रिपोर्ट पेश करने को कहा है। न्यायाधीश महेन्द्र माहेश्वरी की एकलपीठ ने यह आदेश कमलेश की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी जवाहर सर्किल एसएचओ अदालत में पेश हुए। उनकी ओर से कहा गया कि सह आरोपी डीपीएस दत्ता नाम का कोई व्यक्ति डेरे में नहीं मिला है। इसके साथ ही एसएचओ ने अब तक की गई जांच रिपोर्ट अदालत में पेश की। रिपोर्ट को देखने के बाद अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि क्या अब कोर्ट को सिखाना होना कि जांच कैसे करनी है। अदालत ने कहा कि यदि उनसे जांच नहीं हो रही तो पुलिस कमिश्नर से जांच करा लेते हैं। इसके साथ ही अदालत ने मामले की सुनवाई 7 दिसंबर तक टाल दी।