कांग्रेस के नवनिर्वाचित अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कांग्रेस कार्यसमिति को भंग कर 47 सदस्यों वाली स्टीयरिंग कमेटी बना दी है। इसमें चार नेता राजस्थान के हैं। इन्हें अशोक गहलोत खेमे का नेता माना जाता है। खरगे के पक्ष में खुलकर प्रचार करने से लेकर कमेटी में अपने समर्थकों को प्रवेश दिलाने तक, गहलोत का हर दांव बताता है कि फिलहाल तो उनकी कुर्सी को सचिन पायलट से कोई खतरा नहीं है।
खरगे ने स्टीयरिंग कमेटी में भंवर जितेंद्र सिंह, रघु शर्मा, रघुवीर मीना और हरीश चौधरी को शामिल किया है। सचिन पायलट या उनके किसी समर्थक को इस कमेटी में जगह नहीं मिली है। यह कमेटी ही कांग्रेस कार्यसमिति के सभी फैसले लेगी। इसमें ज्यादातर सदस्य कार्यसमिति के ही हैं, लेकिन नए बदलावों से साफ है कि पायलट पर गहलोत एक बार फिर भारी पड़े हैं। खासकर, एक महीने पहले हुई उठापटक में पायलट के पक्ष में खुलकर बैटिंग करने वाले अजय माकन भी हिट विकेट होकर पैवेलियन की शोभा बढ़ा रहे हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि राज्य में अगले साल होने वाले चुनावों में पार्टी गहलोत के नेतृत्व में ही मैदान पकड़ने वाली है।
क्यों खास है स्टीयरिंग कमेटी
स्टीयरिंग कमेटी में 47 नेताओं को रखा गया है। सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी के साथ ही मनमोहन सिंह का नाम भी इन नेताओं में शामिल है। खरगे के अध्यक्ष बनते ही पुरानी कार्यकारिणी भंग हो गई और पदाधिकारियों ने इस्तीफे दे दिए। खरगे अब नए सिरे से कांग्रेस कार्यसमिति गठित करेंगे। तब तक के लिए स्टीयरिंग कमेटी ही सारे काम करेगी।
पायलट का नाम न होने से बेचैनी
स्टीयरिंग कमेटी में सचिन पायलट या उनके किसी समर्थक का नाम न होने से पार्टी में उनके समर्थकों में बेचैनी का माहौल है। हालांकि, दबी जुबान में यह बताया जा रहा है कि सचिन संगठन से दूर रहना चाहते हैं। इसी वजह से कांग्रेस आलाकमान उन्हें दूसरी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दे सकता है। देखना यह है कि क्या बिना सांगठनिक जिम्मेदारी के सचिन पायलट सीएम की कुर्सी पर दावा कर सकेंगे?