गहलोत ने कहा कि विधायकों को इतना क्या भय था, यह उन्हें कैसे मालूम पड़ा, मैं पता नहीं कर पाया, वे कैसे कर पाए। ऐसी नौबत क्यों आई, हमारे सब नेताओं को सोचना चाहिए कि क्या हुआ? उन्होंने कहा कि हम सब में कमियां हैं, उन्हें दूर करने का प्रयास करना चाहिए। हमारे लिए राजस्थान में सरकार बनाना जरूरी है।
राजस्थान में मुख्यमंत्री पद को लेकर घमासान लगातार जारी है। राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रविवार सचिन पायलट पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि नए सीएम के नाम पर 102 विधायक इस कदर भड़क गए कि उन्होंने किसी की नहीं मानी। उन्हें इतना क्या भय था? ऐसा क्यों हुआ, क्या कारण रहे, इस पर तो रिसर्च करना चाहिए।
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गहलोत ने कहा कि विधायकों को इतना क्या भय था, यह उन्हें कैसे मालूम पड़ा, मैं पता नहीं कर पाया, वे कैसे कर पाए। ऐसी नौबत क्यों आई, हमारे सब नेताओं को सोचना चाहिए कि क्या हुआ? उन्होंने कहा कि हम सब में कमियां हैं, उन्हें दूर करने का प्रयास करना चाहिए। हमारे लिए राजस्थान में सरकार बनाना जरूरी है। गहलोत रविवार को सचिवालय में गांधीजी को श्रद्धांजलि देने के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे। गहलोत ने कहा, कई बार कई कारणों से ऐसे फैसले हो जाते हैं। मुझे नहीं मालूम, किन हालात में फैसला हुआ, जब विधायक दल की बैठक बुलाकर एक लाइन का प्रस्ताव पारित करना होता है, तो ही ऑब्जर्वर आते हैं।
राजस्थान कांग्रेस के विवाद पर गहलोत ने कहा, हाईकमान का आदेश होने के बाद एक लाइन का प्रस्ताव पारित करवाना हमारी परंपरा रही है। मैंने सोनिया गांधी से मिलकर कहा कि कांग्रेस विधायक दल का लीडर रहते मेरी जिम्मेदारी थी कि वह प्रस्ताव पारित करवाता, लेकिन वह नहीं हो पाया। पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने विधायकों से जाकर कहा कि आप चलिए। एक लाइन का प्रस्ताव पारित करने का तो कायदा होता है।
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मैं अपना काम कर रहा हूं, निर्णय आलाकमान को लेना है
गहलोत ने राजस्थान में ऑल इज वेल के सवाल पर कहा कि मैं तो अपना काम कर रहा हूं, मेरा मानना है काम करते करते जाओ। जो निर्णय करना है या नहीं करना, अलाकामान को करना है। मैंने तो सोनिया गांधी से जाकर माफी मांग ली, 50 साल के इतिहास में पहली बार एक लाइन का प्रस्ताव पारित नहीं करवा पाया। प्रस्ताव पारित नहीं करवाने का दुख आज भी है और रहेगा।