राजस्थान हाईकोर्ट ने जेल में जैमर लगे होने के बावजूद कैदियों के मोबाइल पर बात करने के मामले में नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि बीस करोड़ रुपए खर्च करने के बाद भी जैमर क्यों नहीं चल रहे हैं।
अदालत ने जेल में मोबाइल पकड़ने के लिए मुहिम छेड़ने के निर्देश देते हुए मामले की सुनवाई पांच मार्च को तय की है। न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और न्यायाधीश गोरधन बाढ़दार की खंडपीठ ने यह आदेश प्रकरण में लिए गए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान पर सुनवाई करते हुए दिए।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकर की ओर से कहा गया कि गत दिनों अजमेर जेल का दौरा किया गया था। जिसमें सामने आया कि आसपास टावर नहीं होने के बावजूद भी जैमर काम नहीं कर रहे हैं। इस पर न्यायमित्र प्रतीक कासलीवाल ने कहा कि जैमर लगाने के लिए बीस करोड़ रुपए खर्च किए गए थे।