राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश में अवैध बस संचालन के मामले में पेश परिवहन आयुक्त शैलेन्द्र अग्रवाल को कहा कि यदि विभाग संबंधित आरटीओ और डीटीओ को निलंबित करें तो बसों का अवैध संचालन रुक जाएगा। अदालत ने कहा कि विभाग, पुलिस और रोडवेज की मिलीभगत से अवैध बसें चल रही हैं। जिसके कारण रोडवेज को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके साथ ही अदालत ने अवैध बसों का संचालन बंद करने के आदेश देते हुए तीस अक्टूबर को पालना रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश सुरेन्द्र कुमार पारीक की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।सुनवाई के दौरान परिवहन आयुक्त, सीकर और अजमेर आरटीओ व झुंझुनूं सहित अन्य अधिकारी पेश हुए। परिवहन आयुक्त ने अदालत के समक्ष स्वीकार किया कि कॉन्ट्रेक्ट कैरिज का परमिट लेकर हजारों बसें स्टेज कैरिज के रूप में यात्रियों को बैठा रही हैं।
आयुक्त ने कहा कि हमारे पास पूरा जाब्ता नहीं है, इसके बावजूद भी अवैध बसों को रोकने के लिए कार्रवाई की जा रही है। वहीं अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि सबकुछ मिलीभगत से हो रहा है। यहां तक की रोडवेज की बस भी इन बसों के काफी पीछे चलाई जाती है, ताकि इन बसों को सवारी मिल सके। इसके अलावा विभाग भी इस मिलभगत में शामिल है। यदि दोषी अफसरों पर निलंबन की कार्रवाई हो जाए तो अवैध बसों का संचालन अपने आप रुक जाएगा। इसके साथ ही अदालत ने अवैध बसों का संचालन रोकने के आदेश देते हुए तीस अक्टूबर को पालना रिपोर्ट पेश करने को कहा है।