जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में सीबीएफसी के अध्यक्ष प्रसून जोशी के शामिल होने को लेकर नई बहस शुरू हो गई। बहस शोभा डे के इस बयान से शुरू हुई है कि 'हो सकता है कि प्रसून जोशी जेएलएफ में हमारे बीच हो।' जबकि प्रसून जोशी आयोजकों को पत्र भेजकर कह चुके है कि वे जेएलएफ में नहीं आएंगे और आयोजकों ने भी इस बात की जानकारी प्रेस कांफ्रेंस में दी थी।
इस बयान के बाद जेएलएफ में खलबली मच गई। सुरक्षा एजेंसिया भी सतर्क हो गई। हालांकि आधिकारिक तौर पर उनके आने की सूचना नहीं थी। दरअसल, मीडिया से बातचीत में शोभा डे ने कहा, 'जैसा उन्होंने सुना उसके अनुसार बता रहीं हूं कि, हो सकता है प्रसून जोशी जेएलएफ में हमारे बीच हो।'
उन्होंने कहा, 'यहां सुरक्षा के पूरे इंतजाम है और असहिष्णुता जैसी कोई बात नहीं है। लेखकों का विरोध तो पहले भी होता रहा है। हर जेएलएफ में किसी ने किसी को धमकी मिलती है, लेकिन उनके विचारों का भी महत्व है। आयोजक भी किसी को यहां सोच समझकर ही बुलाते है।'