भारतीय रेल द्वारा पर्यावरण संरक्षण को लेकर किए जा रहे कई कार्यों के तहत उत्तर पश्चिम रेलवे पर भी पर्यावरण संरक्षण तथा हरित पर्यावरण के कार्यों को प्राथमिकता के साथ किया जा रहा है। ऐसे में भारतीय रेल के प्रत्येक जोन में कम से कम एक रेलमार्ग को 'ग्रीन कोरिडोर' के रूप में विकसित किए जाने का प्रस्ताव है। उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल के बाड़मेर-मुनाबाव तथा पीपाड़ रोड-बिलाड़ा रेलमार्ग को ‘ग्रीन कोरीडोर’ के रूप में विकसित किया गया है।
उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी तरुण जैन ने बताया कि ‘ग्रीन कॉरिडोर’ के अन्तर्गत बाड़मेर-मुनाबाव (119 किलोमीटर), पीपाड़ रोड-बिलाड़ा (41 किलोमीटर) पर संचालित सभी रेलसेवाओं में बायो-टाॅयलेट की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है तथा यह सुनिश्चित किया जा रहा कि इन दोनों रेलमार्गों के ट्रैक पर ह्यूमन वेस्ट न के बराबर हो।
इस तरह भारतीय रेल के ग्रीन कॉरिडोर में आने वाले बाड़मेर-मुनाबाव तथा पीपाड रोड-बिलाड रेलमार्ग क्रमश: चौथे एवं पांचवे रेलमार्ग है, इससे पूर्व दक्षिण रेलवे के रामेश्वरम-मन्नामदुरैई, पश्चिम रेलवे के ओखा-कानालास तथा पोरबंदर-वानसजालिया रेलमार्ग को ग्रीन कॉरिडोर के रूप में विकसित किया गया है।