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डॉक्टर बोले बाबा बिलकुल ठीक, पुलिस नहीं करने दे रही डिस्चार्ज

Fri, 22 Sep 2017 04:02 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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अस्पताल में भर्ती बाबा फलाहारी महाराज - फोटो : amar ujala
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राजस्थान के अलवर जिले में एक लॉ इंर्टन छात्रा से दुष्कर्म के प्रयास के मामले में घिरे संत कौशलेंद्र प्रपन्नाचार्य फलाहारी महाराज को तबीयत खराब होने के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन अब अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि प्रपन्नाचार्य बिल्कुल ठीक है, लेकिन पुलिस उसे डिस्चार्ज कराने को लेकर कोई तैयारी नहीं कर रही है।
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बाबा का इलाज कर रहे डॉक्टर का कहना है प्रपन्नाचार्य के स्वस्थ होने की सूचना पुलिस और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को दे दी गई है और हमारी तरफ से डिस्चार्ज तैयार है। प्रपन्नाचार्य को डिस्चार्ज नहीं कराने को लेकर अब कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार अलवर पुलिस पर किसी तरह के दबाव होने की भी बात सामने आ रही है और प्रपन्नाचार्य के संबध में अस्पताल से ओके रिपोर्ट आने के बावजूद भी पुलिस सक्रिय क्यों नहीं हुई। इससे पहले अलवर के प्रपन्नाचार्य के शिष्यों ने उसे आंतों में संकम्रण होने से अस्पताल में भर्ती करवा दिया, लेकिन अस्पताल ने प्रपन्नाचार्य को पूरी तरह से ठीक बताया है।
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बिलासपुर महिला थाना में पीड़िता का बयान दर्ज कर फलाहारी बाबा के खिलाफ जीरो नंबर एफआईआर दर्ज कर ली, जिसे अलवर के थाने रेफर किया गया।
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छात्रा ने सुनाई पूरी कहानी

अलवर विधायक और अन्य स्थानीय नेताओं के साथ फलहारी महाराज
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर की रहने वाली छात्रा ने जयपुर में रहकर लाॅ की पढ़ाई की। इंटर्नशिप खत्म होने के बाद पीड़िता को तीन हजार रूपए का मानदेय दिया गया, तो परिजनों ने उसे यह पहली कमाई अलवर में फलाहारी बाबा को समर्पित करने की सलाह दी। बिलासपुर के महिला थाने में दिए बयानों में पीड़िता ने बताया है कि 7 अगस्त यानी रक्षाबंधन के दिन पहली कमाई प्रपन्नाचारी फलाहारी महाराज को अर्पित करने के बाद बाबा ने पीड़िता से रात दिव्य धाम में ही रूकने का आदेश दिया। पीड़िता को जज बनवा देने का आश्वासन भी दिया।

इसके बाद बाबा ने उसे प्रसाद खाने को कहा जिसके बाद वह अचेत हो गई और फिर उसने वैसा ही किया जैसा बाबा ने कहा। तभी एक बच्चे ने कमरे का दरवाजा खटखटाया। इससे पीड़िता घबरा गई और मौका पाकर कमरे से बाहर चली गई। इन हरकतों से घबराकर छात्रा दिव्य धाम परिसर से बाहर निकलकर वेद विद्यालय स्थित आश्रम में जा पहुंची। जहां वह एक कमरे में ठहरी और अगले दिन सुबह मौका पाकर वहां से निकल गई और जयपुर आ गई। यहां करीब बीस दिन अवसाद में रही।
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