राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर ने पंजाब में राजस्थान के पीसीपीएनडीटी प्रकोष्ठ की कार्रवाई को सही ठहराया है।
उल्लेखनीय है कि मुखबिर द्वारा दी गयी सूचना के आधार पर 17 मार्च 2017 को राज्य पीसीपीएनडीटी प्रकोष्ठ में गठित पीसीपीएनडीटी ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन द्वारा डॉ. अशोक कुमार एवं नर्स संदीप कौर को गर्भवती महिला की सहयोगी महिला द्वारा भ्रूण लिंग परीक्षण के लिए 20 हजार रुपए की राशि न्यू महावीर नर्सिंग होम, रायसिंह नगर, श्रीगंगानगर, राजस्थान में ली गई थी।
इस मामले में फिरोजपुर (पंजाब) में डॉ. उमेश शर्मा द्वारा भू्रण लिंग परीक्षण करने पर पीसीपीएनडीटी अधिनियम की धारा 4, 5, 6, 21 व 23 नियम 9 व 10 तथा भारतीय दण्ड संहिता की धारा 315, 511, 420 व 120 बी के तहत एफआईआर 10/2017 दर्ज कर अनुसंधान किए जाने को पिटिशनर (अभियुक्त) ने पीबीआई थाने की ओर से की गई कार्रवाई को को क्षेत्राधिकार के बाहर बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
अदालत ने पीसीपीएनडीटी ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, राजस्थान की इस र्कावाई में अपराध का एक भाग रायसिंह नगर, श्रीगंगानगर में घटित होना माना। दण्ड प्रक्रिया सहिंता की धारा 178 ‘‘जहां अपराध अंशतः एक स्थानीय क्षेत्र में और अशंतः किसी दूसरे में किया गया है’’ के अनुसार सही मानकर की गई कार्रवाई को सही ठहराते हुए इस संबंध में दायर याचिका को खारिज कर दिया