जानकारी के मुताबिक, मुहाना पुलिस ने 25 जनवरी को शुभ पूजा सुमेर नगर प्रथम निवासी योगेंद्र को शांतिभंग के आरोप में गिरफ्तार किया था। उसकी जमानत को लेकर काफी प्रयास किए जा रहे थे। इस बीच 27 जनवरी को योगेंद्र का भाई बलवंत जमानत के लिए मानसरोवर थाने पहुंचा था।
बताया जा रहा है कि जब बलवंत थाने पहुंचा, उसी दौरान मानसरोवर एसीपी संजीव चौधरी के पास एक कॉल आया। यह कॉल प्रमुख सूचना आयुक्त डीबी गुप्ता के नंबर से था। कॉलर ने एसीपी से कहा कि योगेंद्र को जमानत पर जल्द छोड़ देना। वहीं, कॉल खत्म होने के बाद बलवंत ने खुद को डीबी गुप्ता का परिचित बताया।
एसीपी पहले आरोपी को छोड़ने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन अचानक उन्हें शक हुआ। ऐसे में उन्होंने प्रमुख सूचना आयुक्त के नंबर पर कॉल मिला दिया। प्रमुख सूचना आयुक्त डीबी गुप्ता ने फोन उठाया और जमानत के लिए फोन नहीं करने की बात कही। इसके बाद पुलिस ने बलवंत को भी गिरफ्तार कर लिया।
जानकारी के मुताबिक, स्पूफिंक कॉल खास तरह के मोबाइल एप्लिकेशन या वीओआईपी सर्वर यानी वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल के तहत की जाती है। इस तरीके से किसी के भी नंबर से साइबर क्रिमिनल कॉल कर सकते हैं और जिसके नंबर से कॉल की जा रही है, उसे पता तक नहीं चलता। अगर इस तरह की किसी कॉल पर आपको शक होता है तो कॉल डिस्कनेक्ट करके री-डायल करें। इससे कॉल स्पूफिंग का पता लग जाएगा।