लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आठ आतंकियों के जेल में बंद रहते हुए भी मोबाइल फोन से पाकिस्तान में बात करने के मामले को कोर्ट ने सुरक्षा में गंभीर चूक माना है। कोर्ट ने आज दोषी आठ आतंकियों को आजीवन कारावास और अर्थ दंड की सजा सुनाते हुए दो राज्यों की संबंधित जेलों के तत्कालीन जेल अधीक्षकों पर भी कार्रवाई करने के आदेश दिए है।
लश्कर-ए-तैयबा के आठ आतंकियों को आज जयपुर की एडीजे कोर्ट 17 ने दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि राजस्थान और पंजाब की जेलों में बंद रहते हुए भी ये आतंकी फोन के जरिए पाकिस्तान में अपने आकाओं से कोडवर्ड में बातचीत कर रहे थे।
कोर्ट ने आदेश की कॉपी को राजस्थान और पंजाब के गृहसचिव और डीजीपी को भी भिजवाई है और कहा है कि जेलों में बंद आतंकियों की पाकिस्तान में बातचीत सुरक्षा व्यववस्था में गंभीर चूक है। अदालत ने इसे जेल अधीक्षकों की गंभीर लापरवाही और अनुशासनहीनता मानते हुए जांच कर रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए हैं।
एडीजे कोर्ट 17 ने अपने फैसले में भी कहा है कि यहां की जेल में रहते हुए इन आतंकियों ने फोन पर पाकिस्तान से सम्पर्क रखा। वहां के आकाओं के इशारे पर वीएचपी के प्रवीण तोगड़िया और शिव सेना के बाला साहेब ठाकरे को मारने वाले प्लान के लिए कोड वर्ड तैयार किए। उनके कोड वर्ड थे कि प्रवीण तोगड़िया और बाला साहेब ठाकरे पर फिल्म बनानी है, जिसका मतलब था कि दोनों को मारना है।
इन जेलों में बंद थे ये आतंकी और आकाओं के इशारे से बना रहे थे नेटवर्क
jail
- फोटो : Demo pic
ये आठ सजायाफ्ता आतंकी 2010 से पहले राजस्थान की बीकानेर व जोधपुर और पंजाब की पटियाला व नाभा जेलों में बंद रहे थे। इन जेलों में रहते हुए इन्होंने अपना नेटवर्क फैलाया था और पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा के आकाओं से देश में आतंक फैलाने के निर्देश ले रहे थे।
गौरतलब है कि जयपुर के कोर्ट नंबर 17 के एडीजे पवन गर्ग ने लश्कर-ए-तैयबा के आठ आतंकियों को देश में दंगा फैलाने और अन्य आतंकी व राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में दोषी पाया है। कोर्ट ने फैसले में कहा है कि ये देश में व्यापक स्तर पर अस्थिरता फैलाना चाहते थे।
कोर्ट ने इन आठों को दोषी मानते हुए विधि विरुद्ध क्रिया-कलाप निवारण अधिनियम की धारा सहित धारा 13, 18, 18 (बी) तथा 20 में सजा सुनाई है और 11-11 लाख रुपए का अर्थदंड लगाया है। कोर्ट ने ये भी माना कि ये देश में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी नेटवर्क को फैलाने की फिराक में थे, जिससे देश में आतंकी हमले भी हो सकें।
तीन पाकिस्तान के और पांच भारत के हैं ये आतंकी
- फोटो : File photo
कोर्ट ने तीन पाकिस्तानी असगर अली, शकर उल्लाह व मोहम्मद इकबाली और पांच भारतीय नागरिकों निशाचंद अली, पवन पुरी, अरुण जैन, काबिल खां और अब्दुल मजीद को जयपुर की एडीजे कोर्ट में लश्कर-ए-तैयबा से सबंध रखने और भारत में आतंकी साजिश रचने का दोषी पाया था।
वर्ष 2010 अक्टूबर में राजस्थान पुलिस की एसओजी टीम ने तीन पाकिस्तानी और पांच भारतीय नागरिकों को आतंकी साजिश के आरोप में गिरफ्तार किया था। हालांकि बाद में मामले की जांच एटीएस को सौंप दी गई थी। एटीएस की जांच में आरोपियों का सबंध आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से होने के सबूत मिले थे।
जांच एजेंसिंयों ने फोन रिकॉर्डिंग के आधार पर इस आतंकी सेल का खुलासा किया था। मामले की सुनवाई सात वर्ष से अधिक समय तक चली। केस में एटीएस ने तीन हजार पन्नों की चार्जशीट भी दाखिल की।