अजमेर में घूघरा स्थित हाई सिक्योरिटी जेल में हार्डकोर बंदी भूख हड़ताल पर रहे। जेल प्रशासन ने समझाइश का प्रयास किया, लेकिन वे अपनी मांग पर अड़े रहे।
हार्डकोर बंदियों की भूख हड़ताल का यह तीसरा दिन है। इससे कई बंदियों की हालत नासाज होने लगी है। तबीयत बिगडऩे पर जेल प्रशासन ने बंदियों को इलाज की पहल की लेकिन जब तक मांगें नहीं मानी जाती है तब तक वे न तो खाना खाएंगे न ही इलाज लेंगे।
जवाहरलाल नेहरू अस्पताल के मेडिकल ज्युरिस्ट डॉक्टर वीडी बीजावत, डॉक्टर अजय शंकर और लैब तकनीशियन की टीम ने भूख हड़ताल पर बैठे हार्डकोर बंदियों का मेडिकल जांच की।
टीम ने बंदियों के गिरते स्वास्थ्य के मद्देनजर पवन राठी, मनीष सैनी, सुनील, महेन्द्र वर्मा, अशोक यादव व मांगीलाल को अस्पताल में भर्ती करवाने की रिपोर्ट दी।
पुलिस के भारी जाब्ते की सुरक्षा व्यवस्था के बीच इन बंदियों को जवाहरलाल नेहरू अस्पताल लेकर आया। बताया जा रहा है कि अस्पताल पहुंचाए गए डॉक्टरों ने उपचार लेने से इन्कार कर दिया। हालांकि, चिकित्सीकीय चैकअप के बाद उन्हें वापस हाई सिक्योरिटी जेल भेज दिया।
जेल प्रशासन के खिलाफ लगाए नारे
जेल में सजा
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अस्पताल में उपचार के लिए भेजे गए बंदी मांगीलाल ने बताया कि उन्हें हाई सिक्योरिटी जेल में बेवजह रखा गया है। यहां कई समस्याएं है। जिनके खिलाफ गैंगवार या गंभीर अपराध नहीं है, उन्हें भी हार्डकोर बंदियों के समान खा जा रहा है। वे सात दिन से भूख हड़ताल पर हैं।
यहां अस्पताल लाए गए बंदियों ने जेल प्रशासन पर आरोप लगाए। उन्होंने मांगें नहीं मानने तक अनशन जारी रखने की बात कही। जेल ले जाने के दौरान पुलिस बस में बंदियों ने जेल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। अचानक हुई नारेबाजी से पुलिसकर्मियों में हड़कम्प मच गया।