दौसा से कांग्रेस विधायक मुरारी लाल मीणा ने कहा कि शुरुआत से ही भेदभाव किया जा रहा है जिसके लिए सीएम से पार्टी स्तर तक आवाज उठाई गई है। उन्होंने विधानसभा के बाहर कहा, 'मेरे क्षेत्र में विकास कार्य हुए हैं जिन्हें मैं अस्वीकार नहीं कर सकता, लेकिन अनेक निर्वाचन क्षेत्रों में सरकार में कई लोगों के काम नहीं हो रहे हैं।' मीणा ने आरोप लगाया कि कई मंत्री, पदाधिकारी और नेता अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के विधायकों की उपेक्षा करते हैं।
उन्होंने कहा कि पार्टी के नेता अनुसूचित जाति/ जनजाति और अल्पसंख्यकों को कांग्रेस की रीढ़ मानते हैं लेकिन विधानसभा, सरकार और पार्टी स्तर पर ही इस रीढ़ को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'इससे पार्टी को कोई फायदा नहीं होगा और पार्टी को इस पर गौर करना चाहिए।' उधर, चाकसू निर्वाचन क्षेत्र के कांग्रेस पार्टी के विधायक वेद प्रकाश सोलंकी ने आरोप लगाते हुए कि विधानसभा में कुछ चुनिंदा लोगों को ही बोलने की अनुमति रहती है।
सोलंकी ने कहा कि कोरोना प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए जिन 50 विधायकों को विधानसभा में बिना माइक की सीटें दी गई हैं उनमें से ज्यादातर दलित, आदिवासी एवं अल्पसंख्यक समुदाय से हैं। उन्होंने पार्टी के मुख्य सचेतक महेश जोशी से इन 50 विधायकों की सूची सार्वजनिक करने और विधानसभा में सीट आवंटित करने के मानदंडों की जानकारी देने की मांग की।
उल्लेखनीय है कि बुधवार को प्रश्नकाल के दौरान विधायक रमेश मीणा ने सवाल पूछना चाहा लेकिन उनकी सीट पर माइक नहीं था। विधानसभा अध्यक्ष जोशी ने उनसे दूसरी सीट पर जाकर सवाल पूछने को कहा जिससे मीणा ने इनकार कर दिया और कहा कि वह अपनी ही सीट से ही सवाल पूछेंगे। जोशी ने बाद में सदन में इस घटना पर नाराजगी जताई थी।