राजस्थान हाईकोर्ट ने करीब चालीस पुलिस निरीक्षकों को राज्य सरकार की ओर से वर्ष 2005, 2006 और वर्ष 2007 में आदेश जारी कर 1997-98 की रिक्तियों के विरुद्ध दी गई पदोन्नति और वरिष्ठता को रद्द कर दिया है।
इसके साथ ही अदालत ने राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण की ओर से 16 मई 2014 को याचिकाकर्ता की याचिका खारिज करने के आदेश को भी रद्द कर दिया है। न्यायाधीश वीएस सिराधना की एकलपीठ ने यह आदेश आरपीएस राजवीरसिंह व अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
याचिका में अधिवक्ता तनवीर अहमद ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ताओं को वर्ष 1997 में एसआई से पुलिस निरीक्षक पद के लिए पदोन्नत किया गया था। इस दौरान करीब चालीस एसआई का सीआई के तौर पर प्रमोशन नहीं हो सका। वहीं बाद में ये एसआई भी पदोन्नति परीक्षा देकर सीआई बन गए, लेकिन इनकी वरिष्ठता याचिकाकर्ताओं से नीचे हो गई। वहीं राज्य सरकार ने 28 जनवरी 1999 को एक परिपत्र जारी कर पदोन्नति की शर्तों में बदलाव कर दिया।
याचिका में ये भी बताया गया
याचिका में कहा गया कि भविष्य की पदोन्नति के लिए जारी किए गए इस परिपत्र को आधार बनाकर वर्ष 2005, 2006 और वर्ष 2007 में राज्य सरकार ने इन चालीस पुलिसकर्मियों को वर्ष 1997-98 की रिक्तियों के विरुद्ध भूतलक्षी प्रभाव से पदोन्नति और वरिष्ठता दे दी।
याचिकाकर्ताओं को इसकी जानकारी मिलने पर राज्य सरकार के इन आदेशों को सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण में चुनौती दी गई, लेकिन अधिकरण ने देरी से याचिका दायर करने का हवाला देते हुए 16 मई 2014 को याचिका खारिज कर दी। इस पर याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इन पुलिसकर्मियों को दी गई पदोन्नति और वरिष्ठता को चुनौती दी।
बिना रिक्तियों के किया गया पदोन्नत
याचिका में कहा गया कि परिपत्र को भूतलक्षी प्रभाव से लागू नहीं किया जा सकता। इसके अलावा वर्ष 1997-98 की रिक्तियां पूर्व में ही भरी जा चुकी थी। ऐसे में बिना रिक्तियों के इन्हें पदोन्नत किया गया। याचिका में यह भी कहा गया कि वर्ष 2005 से पूर्व याचिकाकर्ताओं की वरिष्ठता इन पुलिसकर्मियों से ऊपर थी। इसके बावजूद उन्हें सुनवाई का मौका दिए बिना याचिकाकर्ताओं की वरिष्ठता सूची बदल दी गई।
जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने चालीस पुलिसकर्मियों को दी गई पदोन्नति और वरिष्ठता को रद्द कर दिया है।