गुजरात विधानसभा चुनाव में जीत के बाद उठे इस एक ज्वलंत सवाल ने अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर भाजपा कि चिंता बढ़ा दी है। ये चिंता विशेषकर चुनाव से पूर्व तय किए गए मिशन को लेकर है।
राजस्थान में भी ठीक एक साल बाद दिसंबर 2018 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही दलों ने अपनी-अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। राजस्थान में विधानसभा की 200 सीटें हैं और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने राजस्थान को 'मिशन-180' दिया है।
गुजरात में 182 विधानसभा की सीट है और वहां के लिए 'मिशन-150' तय किया गया था, लेकिन 'मिशन-150' को हासिल करने में भाजपा काफी पीछे रह गई। वहां भाजपा सरकार बना रही है, लेकिन मिशन का आकड़ा बहुत पीछे छूट गया है। जबकि इस मिशन को पूरा करने के लिए भाजपा ने अपनी पूरी ताकत लगा दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अमित शाह पूरी तरह सक्रिय रहे।
राजस्थान में यूं पड़ेगा असर
अमित शाह/फाइल फोटो
राजस्थान में विधानसभा की 200 विधानसभा सीट हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 161, कांग्रेस ने 24, बसपा ने दो, नेशनल पीपुल पार्टी ने चार, जमीदारा पार्टी ने दो और निर्दलीयों सात सीट पर कब्जा किया था।
विधानसभा चुनाव-2018 के लिए राजस्थान में मिशन-180 दिया है। गुजरात चुनाव परिणाम इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि नोटबंदी, जीएसटी, जैसे कदमों का असर पड़ा है। भले ही इसे भाजपा नकारे। स्थानीय मुद्दों में आरक्षण ने भी गुजरात में खासा असर डाला है।
बात राजस्थान की करें तो यहां भाजपा में अंदरूनी तौर पर प्रदेश नेतृत्व को लेकर खासी नाराजगी है। सत्ता और संगठन के बीच खींचतान कई बार सामने आ चुकी है। विधायक कई मुद्दों पर अपनी ही सरकार को घेरते नजर आए हैं। दो-तीन विधायक तो ऐसे हैं जिन्होंने अपनी ही पार्टी की सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। वे कई बार नेतृत्व परिवर्तन की मांग उठा चुके हैंं।
राजस्थान सरकार के सामने ये हैं चुनौतियां
vasundhra raje
- फोटो : vasundhra raje
वसुंधरा सरकार ने सरकारी नौकरियों को जो वादा किया था, उसे पूरा नहीं किया। कभी आरक्षण विवाद के चलते तो कभी अन्य कारणों से ये अटका रहा।
आरक्षण को लेकर विवाद अभी तक नहीं सुलझा है। इस बारे में सरकार की ओर से जो भी फैसला लिया उस पर अदालती विवाद हो गया। इससे गुर्जर तथा अन्य जातियों में खासी नाराजगी है।
किसानों की कर्जमाफी की मांग को नजरअंदाज किया गया।
डॉक्टर्स की बार-बार हड़ताल से जनता परेशान।
वेतन आयोग में विंसगतियों और एरियर को लेकर कर्मचारियों में भारी आक्रोश।
प्रदेश में कानून व्यवस्था बिगड़ी है। पहलू खां, अफराजुल लाइव मर्डर, चेतन सैनी, पद्मावती विवाद, जयपुर में उपद्रव, आनंदपाल एनकाउंटर समेत ऐसे कई मुद्दे है जिनकों लेकर सरकार की किरकिरी हुई है।