भ्रष्टचार के आरोपों से घिरे नौकरशाहों को बचाने वाले कानून को लेकर राजस्थान सरकार अपनों के साथ विरोधियों के भी निशाने पर रही है। अपने इस काले कानून को बचाने के लिए सरकार अधिकारियों के खिलाफ झूठे मुकदमों का गैर जरूरी तर्क भी दे रही है।
लेकिन उसके ही अधिकारी सरकार की फजीहत करवा रहे है। दरअसल इसी माह सरकार ने राजस्थान कैडर के आईएएस नीरज के पवन को निलंबन के बाद बहाल किया है। पवन पर भ्रष्टाचार के आरोप है और वे आठ माह जेल में भी रहे है।
लेकिन नीरज के पवन पुन: जेल की हवा खा सकते है। दरअसल पवन पर आरोप है जब वे चिकित्सा विभाग में मिशन निदेशक थे तब उन्होंने गलत तरीके से अपने दो रिश्तेदारों को विभाग में नौकरी पर लगवाया था।