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गूगल, एपल और फेसबुक से टैक्स वसूलेगा फ्रांस, अमेरिका ने जताया विरोध

Wed, 10 Apr 2019 06:57 AM IST
vivek shukla न्यूज सर्विस, न्यूयॉर्क टाइम्स, पेरिस
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सांकेतिक तस्वीर
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अमेरिका की चिंता को दरकिनार कर आखिरकार फ्रांस ने गूगल और फेसबुक जैसी दिग्गज इंटरनेट कंपनियों पर नया टैक्स लगाने को मंजूरी दे दी है। इस इंटरनेट टैक्स को गाफा (गूगल, अमेजन, फेसबुक और एपल) नाम दिया गया है। हालांकि, अमेरिका ने इस पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए अपने नाटो सहयोगी फ्रांस से इस विचार को त्यागने का आग्रह किया था।  

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फ्रांस के संसद में सोमवार को चली लंबी चर्चा और वोटिंग के बाद सांसदों ने इंटरनेट टैक्स को मंजूरी दे दी। फ्रांसीसी वित्त मंत्री ब्रूनो ले माइरे ने कहा कि फ्रांस को इस तरह का कदम उठाने पर गर्व है। नेशनल एसेंबली में इस प्रस्ताव को 55 मत के साथ मंजूर किया गया, जबकि इसके विरोध में 4 मत पड़े। 5 सांसदों ने मतदान में भाग नहीं लिया। इसे कानून बनने से पहले सीनेट या उच्च सदन में मतदान के लिए रखा जाएगा। इस कानून को गाफा (गूगल, अमेजन, फेसबुक और एपल) नाम दिया गया है।

यह ऐसे समय आया है, जब दुनिया की सबसे अमीर कंपनियों में से कुछ कंपनियों को कम टैक्स का भुगतान करने की वजह से नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। वित्त मंत्री ब्रूनो ने संसद में मतदान से पहले कहा कि फ्रांस को इस तरह के विषयों पर अगुवाई करने में गर्व महसूस हो रहा है। यह मसौदा 21वीं सदी के लिए अधिक प्रभावी और निष्पक्ष टैक्स प्रणाली की दिशा में एक कदम है।
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3 फीसदी टैक्स का मसौदा किया था पेश
फ्रांस के वित्त मंत्री ब्रूनो ने कहा कि यह अस्वीकार्य है कि डिजिटल क्षेत्र की दिग्गज कंपनियां उपभोक्ताओं के आंकड़ों से भारी मुनाफा कमाती हैं, लेकिन फ्रांस में होने वाले लाभ पर विदेश में टैक्स लगाया जाता है। पिछले महीने फ्रांस ने डिजिटल विज्ञापन, किसी भी प्रौद्योगिकी कंपनी जो व्यक्तिगत डेटा की बिक्री और अन्य राजस्व से दुनियाभर में हर साल 75 करोड़ यूरो (84 करोड़ डालर) से अधिक कमाती है, उस पर तीन प्रतिशत टैक्स लगाने के लिए मसौदे को पेश किया था। आयरलैंड जैसे कम टैक्स वाले देशों द्वारा बड़ी तकनीकी कंपनियों को लुभाने वाले यूरोपीय संघ के व्यापक प्रयास के बाद फ्रांस राष्ट्रीय स्तर पर कानून पर सहमति बनाने की मांग कर रहा है। 

अमेरिकी ने की थी योजना टालने की अपील
अमेरिका ने फ्रांस से इस योजना को टालने का आग्रह किया था, लेकिन फ्रांस ने इसे अनसुना कर दिया। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा था कि यह योजना अमेरिकी कंपनी और फ्रांस के नागरिकों दोनों को प्रभावित करेगा, जो इन प्लेटफार्म का इस्तेमाल करते हैं।

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