एक यहूदी महिला इराक के रिफ्यूजी कैंप में दो हफ्तों रही थी लेकिन उसे इस बात का डर रहा कि आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के लड़ाके उसे फिर से अपनी गिरफ्त में न ले ले।
आईएस के लड़ाकों से खुद को बचाने के लिए यहूदी महिला ने जो कदम उठाया है वह चौंका देने वाला है। पीड़िता दोबारा आईएस के हाथों में न आ जाए, इस डर के साथ उसने अपने शरीर को जला डाला है ताकि वह बदसूरत दिखे और फिर से उसका बलात्कार न हो सके।
ऐसा कदम उठाने के बाद 17 साल की पीड़िता के बाल, चेहरा और शरीर के बाकी अंग बूरी तरह से जल गए हैं।
करीब चार लाख यहूदी तबाह हो चुके हैं
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एनडीटीवी की खबर के अनुसार, पीड़िता उन 1100 महिलाओं में से एक है जो हाल ही में आईएस के चंगुल से छूटी हैं और फिलहाल जर्मनी के शरार्णथी कैंप में हैं। बताते चलें कि 3 अगस्त 2014 को आईएस ने नार्थ इराक से यहूदियों को बंदी बना लिया था और उन्हें तीन ग्रुप में बांट दिया था।
बंदी किए गए जवान लड़कों को लड़ने के लिए आतंकियों ने अपने दल में शामिल कर लिया और ज्यादा उम्र के पुरुष जो इस्लाम कबूल नहीं कर रहे थे उन्हें जान से मार दिया गया। बंदी बनाई गई महिलाओं और लड़कियों का यौन शोषण किया गया और सेक्स सलेवर बना दिया गया पीड़िता उनमें से एक थी।
यूनाइटेड एक्सपर्ट पैनल ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि आईएस के इस हमले के बाद सिंजर में यहुदी पूरी तरह खत्म हो गए हैं क्योंकि 4 लाख में से कुछ गायब हो गए हैं, पकड़ लिए गए हैं और मार दिए गए हैं। इस तरह से यहूदियों की अधिकांश आबादी तबाह हो गई है। इतना ही नहीं बताया जा रहा है कि अभी भी 3200 को आईएस ने सीरिया में बंदी बनाया हुआ है।