विवादित इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाईक पर जांच एजेंसियों का शिकंजा कसता जा रहा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए नाईक के इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (आईआरएफ) और अन्य संस्थाओं की 18.37 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर ली। जाकिर के खिलाफ यह कार्रवाई धन शोधन (मनी लांड्रिंग) मामले की जांच को लेकर की गई है।
वहीं राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने जाकिर को दूसरा नोटिस जारी कर आतंक रोधी कानून के तहत उसके खिलाफ दर्ज एक मामले में 30 मार्च को पेश होने को कहा है। एजेंसी ने इसी महीने पहला समन जारी करके उससे 14 मार्च को पेश होने को कहा था। लेकिन वह नहीं आया। उसे यहां एनआईए के मुख्यालय में तलब किया गया है।
वहीं इससे पहले, ईडी ने धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत संपत्ति की जब्ती के लिए प्रोविजनल आदेश जारी किया। जाकिर की जब्त की गई संपत्तियों में 9.41 करोड़ रुपये के म्यूचुअल फंड, आईआरएफ के नाम से खोले गए पांच बैंक खातों में जमा 1.23 करोड़ रुपये शामिल हैं। इसके अलावा 7.05 करोड़ रुपये की कीमत वाली स्कूल की एक इमारत और 68 लाख रुपये की कीमत वाला एक गोदाम शामिल है। स्कूल की इमारत इस्लामिक एजुकेशन ट्रस्ट चेन्नई तथा गोदाम मैसर्स हारमनी मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर दर्ज है।
ईडी का कहना है कि ये संपत्तियां मामले में इनकी भूमिका के कारण जब्त की गई हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी ने जाकिर नाईक और अन्य के खिलाफ गत दिसंबर में आपराधिक मामला दर्ज किया है। इसे एनआईए द्वारा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत की गई शिकायत का संज्ञान लेते हुए दर्ज किया गया। ईडी ने जाकिर नाईक को उसके समक्ष पेश होने के लिए चार समन जारी किए थे लेकिन उसने किसी का भी जवाब नहीं दिया।