सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि एकतरफा संघर्ष विराम के दौरान एलओसी पर घुसपैठ बढ़ी है। इसके चलते कुछ आतंकी पूंछ और राजौरी जिले के साथ ही एलओसी से कश्मीर घाटी में घुसपैठ करने में कामयाब रहे हैं। इसने सुरक्षा बलों की चिंता बढ़ा दी है क्योेंकि वे खुद को इस महीने के अंत में शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा के लिए तैयार कर रहे हैं। अमरनाथ यात्रा दो महीने तक चलती है।
आतंकियों की भर्ती के मामले 2018 हो सकता है सबसे बुरा साल
अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2018 आतंकी गुटों में युवाओं के शामिल होने के मामले में सबसे बुरा साल हो सकता है। इस साल मई तक 81 युवक आतंकी गुटों में शामिल हो चुके हैं और साल के अंत के यह आंकड़ा बहुत बढ़ सकता है। वर्ष 2017 में 126 युवकों ने बंदूक थामी थी।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा और संसद में पेश आंकड़ों के अनुसार, 2010 के बाद यह सबसे अधिक है। 2010-2013 की तुलना में 2014 के बाद से घाटी में आतंकी गुटों में शामिल होने वाले युवाओं की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। 2010 से 2013 तक क्रमश: 54, 23, 21 और 6 युवक आतंकी गुटों में शामिल हुए जबकि 2014 में यह संख्या 53, 2015 में 66 और 2016 में यह संख्या बढ़कर 88 हो गई।
पढ़े-लिखे युवा बन रहे आतंकी
इस साल आतंकी गुटों में शामिल होने वाले युवाओं में कई उच्च शिक्षित भी हैं। इनमें 26 वर्षीय जुनैद अशरफ सेहरई भी है जो कश्मीर यूनिवर्सिटी से एमबीए डिग्री धारी है। उसके पिता ने तहरीक ए हुर्रियत की कमान सैयद अली शाह गिलानी से थामी है। यह गुट पाकिस्तान समर्थक अलगाववादी संगठन है। इसके अलावा कुपवाड़ा निवासी और पीएचडी स्कॉलर मन्नान बशीर वानी भी आतंकी गुट में शामिल हुए है। उसने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है।