विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) एक विशेष योजना से लाभान्वित सौ महिला वैज्ञानिकों की कहानियां लेकर आ रहा है। इसमें खासतौर पर उन महिलाओं की कहानियां हैं, जिन्होंने पारिवारिक जिम्मेदारियों की वजह से अपना कैरियर छोड़ दिया और फिर विज्ञान के क्षेत्र में वापसी की।
डीएसटी की महिला वैज्ञानिक योजना (डब्ल्यूओएससी) के तहत इन महिलाओं की मदद की गई। डब्ल्यूओएससी को इस क्षेत्र में अच्छा काम करने के लिए 2015 में नारी शक्ति पुरस्कार मिल चुका है।
इस योजना का लाभ लेने के लिए 27 से 45 साल तक की महिलाओं को विज्ञान, इंजीनियरिंग, औषधीय बौद्धिक संपदा से जुड़े क्षेत्रों में योग्यता रखने के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है।
वर्तमान में बड़ी संख्या में ऐसी महिलाएं प्रशिक्षित हुई हैं। योजना में ऐसी ही लगभग 800 महिलाओं के 11 समूहों को अब तक प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसमें से 270 महिलाओं को पेटेंट एजेंट के रूप में पंजीकृत किया गया।
इस योजना ने इन महिलाओं को तकनीकी रूप से सक्षम और वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाया है। इस योजना का लाभ लेने वाली कई ऐसी महिलाएं भी हैं जो पहले घर में बैठी थी लेकिन अब वह विज्ञान और तकनीकी प्रोफेशनल बन गई हैं। ऐसे 100 महिला वैज्ञानिकों के सफर की दास्तान को डीएसटी की ओर से एक किताब के रूप में संकलित किया है।