युवा हल्लाबोल द्वारा बेरोजगारी के खिलाफ एक देशव्यापी युवा-आंदोलन शुरू किया जाएगा। 'जॉब चाहिए, जुमला नहीं' : इस शीर्षक से 27 जनवरी को दिल्ली में 'यूथ समिट' आयोजित होगा। देश के 50 से ज्यादा युवा संगठनों ने इस समिट में भाग लेने के लिए सहमति दे दी है। इस सम्मेलन के जरिए नौकरियों में लगातार हो रही भारी कमी और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकारों की पोल खोलकर उन्हें जवाबदेह बनाया जाएगा।
युवा-हल्लाबोल के पदाधिकारी अनुपम ने मंगलवार को एक प्रेसवार्ता में आंदोलन की वेबसाइट www.yuvahallabol.in लॉन्च करते हुए कहा, यह वेबसाइट बेरोजगारी के सवाल पर देशभर में चल रहे संघर्षों की सूचना युवाओं तक पहुंचाएगी। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि पेपर लीक की खबरें आना अब सामान्य बात हो गई है। वर्ष 2018 में ही कम से कम 24 परीक्षाओं के पर्चे लीक हो गए।
बेरोजगारी पर लगातार काम कर रहे युवा शक्ति संगठन के गौरव ने कहा कि सालाना एक करोड़ नौकरी देने का वादा करने वाली मोदी सरकार रोजगार के पैमाने पर पूर्णतः विफल रही है। पहले की सरकारों की विफलता के कारण ही 2014 में देश के युवाओं ने इस सरकार का साथ दिया था।
आज नौकरियों में लगातार कमी आ रही है। नौकरियों में भ्रष्टाचार एवं धांधली बढ़ रही है। अभी हाल में सीएमआईई की रिपोर्ट बताती है कि साल 2018 में ही 1.1 करोड़ नौकरियां कम हो गई हैं। आज जरूरी है कि सरकार रोजगार गारंटी कानून बनाए, ताकि हर शिक्षित युवा को देश के विकास में भागीदारी देने का अवसर मिले।
अनिश्चितता और असुरक्षा के भाव में जी रहे हैं युवा...
अनुपम ने कहा कि युवाओं में आज अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता और असुरक्षा का भाव है। रोजगार के अवसरों में लगातार कमी की जा रही है। युवा सड़क पर हैं, 24 लाख पद खाली पड़े हैं, मगर सरकार को कोई चिंता नहीं। नौकरियां निकलती भी हैं तो परीक्षा नहीं होती। परीक्षा हो भी जाएं तो पेपर लीक हो रहा है।
छात्रों की शिकायत है कि मेरिट या मेहनत से नहीं, बल्कि पैसे या पैरवी से ज्यादातर नौकरियां मिल रही हैं। अगर परीक्षा पूरी हो भी जाए तो नियुक्ति देने में कई वर्ष लगा देते हैं। 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस पर देशभर के दो दर्जन से ज्यादा शहरों में युवा-पंचायत का आयोजन होगा। इसमें युवा-हल्लाबोल के मांगपत्र पर चर्चा और 27 जनवरी के आंदोलन की तैयारी की जाएगी।