सुप्रीम कोर्ट और शेख अली की गुमटी
- फोटो : ANI / archaeology.delhi.gov.in
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के डिफेंस कॉलोनी इलाके में मौजूद लोदी काल के स्मारक 'गुमटी ऑफ शेख अली' के आसपास गंदगी और अव्यवस्था पर दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा, 'अगर कोई बड़ा नेता या मेहमान आने वाला हो, तो आप 2 घंटे में सफाई कर देते हैं, लेकिन आम हालात में जगह गंदी पड़ी रहती है। यह कोर्ट के आदेशों की इज्जत दिखाने का तरीका है?'
यह भी पढ़ें -
Swadeshi: स्वदेशी को लेकर चलेगा राष्ट्रीय अभियान, 140 करोड़ लोगों का बाजार अपने लोगों के लिए इस्तेमाल करने की
'अफसरों की जिम्मेदारी तय करें और एक्शन प्लान दें'
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और एसवीएन भट्टी की बेंच ने एमसीडी कमिश्नर को आदेश दिया कि वह अपने अफसरों की जिम्मेदारी तय करें और कोर्ट को एक एक्शन प्लान सौंपें। साथ ही, कोर्ट ने एक वरिष्ठ अधिकारी को रोजाना हालात की निगरानी के लिए नियुक्त करने को कहा। उस अधिकारी का नाम कोर्ट कमिश्नर और वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन को भी दिया जाएगा।
साइट विजिट में मिली लापरवाही
कोर्ट कमिश्नर ने बुधवार को मौके का निरीक्षण किया और अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी। रिपोर्ट में गंदगी और आदेशों की अनदेखी साफ दिखाई दी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई और दोपहर 3 बजे तक एमसीडी कमिश्नर को खुद कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा, 'हमने एमसीडी को काफी समय और छूट दी, लेकिन हमारी उम्मीदें उनके रवैये से टूट गई हैं। लगता है कि कोर्ट के आदेशों को गंभीरता से नहीं लिया गया।' वहीं कोर्ट में एमसीडी कमिश्नर ने पेश होकर माना कि कुछ कम्युनिकेशन गैप हुआ था, खासकर सीमेंटेड हिस्से को लेकर, और भरोसा दिलाया कि इसे हटाया जाएगा।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब सुप्रीम कोर्ट ने डिफेंस कॉलोनी रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन को निर्देश दिया कि वे गुमटी परिसर से अपने ढांचे हटाएं और 40 लाख रुपये का मुआवजा दिल्ली सरकार के पुरातत्व विभाग को दें। यह मामला डिफेंस कॉलोनी निवासी राजीव सूरी की याचिका पर चल रहा है, जिन्होंने 2019 में दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा याचिका खारिज करने के बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
यह भी पढ़ें -
HC: 'दादी का पोते से भावनात्मक रिश्ता होने के बावजूद, बच्चे पर मां-बाप का ही अधिकार', हाईकोर्ट का अहम फैसला
AMASR एक्ट के तहत सुरक्षा
एंशिएंट मोन्यूमेंट्स एंड आर्कियोलॉजिकल साइट्स एंड रिमेन्स एक्ट, 1958 के तहत संरक्षित स्मारकों को कानूनी सुरक्षा दी जाती है। इसके तहत, स्मारक के आसपास अवैध निर्माण या खुदाई नहीं हो सकती; स्मारक के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए नियमित प्रयास किए जाते हैं। भविष्य की पीढ़ियों के लिए ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखा जाता है। सुप्रीम कोर्ट लगातार आदेश देकर गुमटी परिसर से अतिक्रमण हटाने, अवैध कब्जे खत्म करने और परिसर को सुंदर बनाने की दिशा में काम कर रहा है।