नेहरू मेमोरियल संग्रहालय और पुस्तकालय की साइट पर लोगों से सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों के संग्रहालय के लिए डिजाइन और विचार मांगे गए हैं। यह सुझाव सरकार की तरफ से मांगे गए हैं। संग्रहालय सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों के लिए समर्पित होगा।
हालांकि यह अगस्त 2017 तक व्यवस्थित किया जाना था। लेकिन अब इसकी समयसीमा बढ़ा दी गई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि mygov.in के माध्यम से आप डिजाइन भेज सकते हैं। इसके बाद सरकार विचार विमर्श करने के बाद आपको कॉल करेगी। इसके लिए 10 हजार रुपए की पुरस्कार राशि भी दी जाएगी। बता दे कि एनएमएमएल और तीन मूर्ति भवन पहले प्रधानमंत्री जवाहरवाल नेहरू का निवास स्थान था। लेकिन यहां कुछ कमी को देखते हुए परिसर में एक नए संग्रहालय के निर्माण का प्रस्ताव रखा गया है।
संस्कृति मंत्रालय द्वारा mygov.in पर कहा गया है कि प्रधानमंत्री की यह संस्था लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए इसे बेहतर तरीके से समझाया जाना चाहिए। आगे यह भी कहा गया है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे कई प्रधानमंत्रियों के जीवन और उनके कार्यों को अच्छी तरह से दस्तावेज नहीं किया गया है। बहुत से लोगों पर बहुत ही कम ध्यान दिया गया है। जबकि इनके योगदान काफी हैं हालांकि हम इनकी किसी के काम से तुलना नहीं कर सकते हैं। इसलिए इसे एक प्रक्रिया के तहत सुविधाजनक बनाएंगे। 15,000-20,000 वर्ग मीटर फैले भवन के लिए ये सुझाव मांगे गए हैं। यह भविष्य के लिए उन्मुख होना चाहिए। क्योकि दिल्ली एक ऐतिहासिक शहर भी है।
एनएमएमएल के निदेशक शक्ति सिन्हा ने कहा कि पीएम के लिए एक नया संग्रहालय बनाने की योजना अमेरिका के मॉडल से प्रेरित है। जहां निवर्तमान राष्ट्रपतियों ने अपने गृह राज्य में राष्ट्रपति पुस्तकालय की स्थापना की है। लेकिन हम कितने संग्रहालयों का निर्माण कर सकते हैं। हमारे पास पहले से ही 15 पीएम हैं। यही कारण है कि सरकार ने मौजूदा जगह को लोकतांत्रिक बनाने की योजना बनाई है।
सेंटर फॉर स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज से जुड़े दिल्ली स्थित राजनीतिक विश्लेषक अभय कुमार दुबे ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का एक वर्ग है जिसने नेहरू की विरासत पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा ऐसा लगता है कि सरकार सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों के लिए एक संग्रहालय बनाकर नेहरू की विरासत को कम करना चाहती है।