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Prahlad Jani: योगी प्रह्लाद जानी उर्फ चुनरीवाला माताजी का निधन, 76 साल से नहीं लिया था 'अन्न-जल'

Wed, 27 May 2020 11:14 AM IST
अनवर अंसारी पीटीआई, अहमदाबाद

सार

  • योगी प्रह्लाद जानी का निधन
  • 76 साल तक अन्न-जल ग्रहण किए बिना जीवित रहने का किया था दावा
  • डीआईपीएएस ने की थी दावे की जांच
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प्रह्लाद जानी - फोटो : Twitter
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विस्तार
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सत्तर साल से भी अधिक समय से अन्न-जल ग्रहण किए बिना जीवित रहने का दावा करने वाले योगी प्रह्लाद जानी उर्फ चुनरीवाला माताजी का मंगलवार सुबह गुजरात के गांधीनगर जिले में निधन हो गया। वह 90 साल के थे।

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उनके शिष्यों की ओर से जारी एक बयान के अनुसार जानी ने अपने पैतृक गांव चराड़ा में अंतिम सांस ली। गुजरात में बड़ी संख्या में उनके अनुयायी हैं। बिना अन्न-जल ग्रहण किए जीवित रहने के जानी के दावे को 2003 और 2010 में वैज्ञानिकों ने परखा था।


वह दावा किया करते थे कि उन्हें अन्न-जल ग्रहण करने की इसलिए जरूरत नहीं पड़ती क्योंकि देवी मां ने उन्हें जीवित रखा है। इस बीच, जानी का पार्थिव शरीर बनासकांठा जिले में अंबाजी मंदिर के समीप उनके आश्रम सह गुफा में ले जाया गया है।
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बयान में कहा गया है कि माताजी ने अपने मूल स्थान पर कुछ समय गुजारने की इच्छा प्रकट की थी जिसके बाद उन्हें कुछ दिन पहले चराड़ा ले जाया गया था। उन्होंने आज प्रात: अंतिम सांस ली। उनका पार्थिव शरीर कुछ दिन के लिए उनके आश्रम में रखा जाएगा ताकि उनके अनुयायी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर सकें। गुरुवार को उनके आश्रम में उन्हें समाधि दी जाएगी। 

देवी मां अंबे में अटूट विश्वास रखने वाले जानी हर समय चुनरी पहना करते थे और महिला की तरह रहते थे। इसके कारण वह चुनरीवाला माताजी के नाम से चर्चित थे। उनका दावा था कि उन्होंने अपने जीवन के 76 साल बिना भोजन और पानी के गुजारे। उन्होंने आध्यात्मिक अनुभव की तलाश में बहुत ही कम उम्र में अपना घर छोड़ दिया था।

उनके अनुयायियों का दावा है कि महज 14 साल की उम्र में उन्होंने खाना-पीना छोड़ दिया था। जानी ने बहुत कम उम्र में अंबाजी मंदिर के समीप एक छोटी सी गुफा को अपना घर बना लिया था। बाद में, वह एक ऐसे योगी के रूप में लोकप्रिय हो गए जो बस हवा पर जीवित रहते थे।

डीआईपीएएस ने की थी दावे की जांच
वर्ष 2010 में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन से संबद्ध डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ फिजियोलोजी एंड एलाइड साइंससेज (डीआईपीएएस) के वैज्ञानकों एवं संबंधित डॉक्टरों ने यह जानने के लिए जानी का 15 दिनों तक निरीक्षण किया था कि वह कैसे बिना अन्न-जल के जीवित रहते हैं। डीआईपीएएस ने बाद में कहा था कि जानी में भूख और पानी से बचने के लिए कुछ अतिरेक प्रकार का अनुकूलन है।

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