भाजपा सांसद एवं महंत आदित्यनाथ ने कहा कि देश के किसी भी शिक्षण संस्थान में जिन्ना पैदा नहीं हो पाएंगे। अगर कहीं ऐसी कोशिश होती है तो जिन्ना बनने से पहले उन्हें दफन कर दिया जाएगा। देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, पर इसका मतलब यह नहीं कि देशद्रोहियों को महिमामंडित किया जाए।
जेएनयू प्रकरण पर शनिवार को मीडिया से मुखातिब आदित्यनाथ ने कहा कि ताजे घटनाक्रम से यह सवाल उठने लगा है कि जेएनयू में जवाहरलाल पैदा हो रहे हैं या जिन्ना। सभी जानते हैं कि देश का बंटवारा जिन्ना की वजह से हुआ था। लिहाजा किसी दूसरे को जिन्ना बनने का अवसर नहीं दिया जाएगा।
इस देश में रहने वालों को मौलिक अधिकार दिए गए हैं। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी है लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि देशद्रोहियों का साथ देकर उन्हें महिमामंडित किया जाए। जिन लोगों ने लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर (संसद) पर हमला किया हो या जो उनसे जुड़ा हो उसके पक्ष में खड़ा होने वाला कहीं से भी राष्ट्रभक्त नहीं हो सकता है।
एक सवाल के जवाब में सांसद ने कहा कि कन्हैया के मामले की जांच चल रही है। इस बात पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि कन्हैया को अदालत से जमानत और रिहाई किन शर्तों पर दी गई है। न्यायालय में अभी इस मामले पर विस्तार से संज्ञान लिया जाना है। इसमें दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। पुलिस और अदालत में केंद्रित इस प्रक्रिया से भाजपा या केंद्र सरकार का कोई लेना-देना नहीं है।
कन्हैया और शाहरुख खान की भाषा के फर्क के सवाल पर कहा कि किसी की तुलना किसी और से नहीं की जा सकती। हर व्यक्ति और संस्थान को अपनी मर्यादाओं का ख्याल रखना चाहिए।
उच्च मापदंडों को जीवन में उतारना चाहिए। ताकि संस्थाओं की भावनाओं का सम्मान किया जा सके। जहां तक जेएनयू का मामला है तो वहां की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। सबसे दुर्भाग्य की बात यह है कि वहां के शिक्षक भी उसमें लिप्त हैं। ऐसा शर्मनाक और निंदनीय है।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय की छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह के वेमुला प्रकरण और महंत आदित्यनाथ पर बयान के हवाले से खुद पर कार्रवाई का खतरा बताने के सवाल पर सांसद आदित्यनाथ बोले, ये भटके हुए लोग हैं। भटकी हुई आत्माओं के बारे में कुछ कहना मेरे लिए मुनासिब नहीं है।