भले ही उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर नतीजे आने के बाद से ही कयासबाजी का दौर चला हो, मगर हकीकत यह है कि इस मामले में फैसला विधायक दल की बैठक वाले दिन सुबह हुआ। इसी दिन प्रधानमंत्री निवास पर सुबह सात बजे पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, सूबे के प्रभारी ओम माथुर, संगठन मंत्री सुनील बंसल के बीच तीन घंटे बैठक चली।
इसी बैठक में पहली बार मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री पद के चेहरे पर मंथन के बाद सहमति बनी। विधायक दल की बैठक से एक दिन पहले लखनऊ पहुंचे पर्यवेक्षक केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू और भाजपा महासचिव भूपेंद्र यादव को भी चेहरे को लेकर कोई जानकारी नहीं थी। राज्य के कुछ वरिष्ठ नेताओं से बातचीत कर पर्यवेक्षकों ने अध्यक्ष अमित शाह को महज इतनी जानकारी दी थी कि विधायक आलाकमान के फैसले पर बिना किसी हिचक के अपनी सहमति देंगे।
पूरे मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पार्टी के एक वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नतीजे आने के एक दिन बाद बस इस पर सहमति बनी थी कि दो उप मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। इसके बाद सभी को मीडिया और आम लोगों की तरह इस मामले में प्रधानमंत्री और शाह के अगले कदम का इंतजार था। पहले लगा था कि उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पद का चेहरा तय करते समय ही उत्तर प्रदेश के संदर्भ में भी फैसला ले लिया जाएगा, मगर ऐसा नहीं हुआ। पर्यवेक्षकों को विधायक दल की बैठक से पहले चुनिंदा नेताओं से बातचीत कर नेतृत्व के संभावित फैसले के बारे में महज फीडबैक मांगा गया।
असली कहानी शनिवार को सुबह सात बजे शुरू हुई जब पीएम मोदी के साथ नेताओं की बैठक शुरू हुई। इसी बैठक में योगी का नाम तय हुआ और उन्हें तत्काल दिल्ली तलब किया गया। बतौर पर्यवेक्षक वहां गए एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक जब उन्होंने विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री पद के लिए नेतृत्व के पसंद के रूप में योगी का नाम लिया तो सारे विधायक सीट से खड़े हो गए।