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बूचड़खाना-मीट विवादः योगी ने कोई नए नियम नहीं बनाए, सिर्फ 'माहौल' बनाया

Sat, 25 Mar 2017 01:14 PM IST
amarujala.com- Presented by: राघवेंद्र मिश्र
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योगी आदित्यनाथ
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योगी आदित्यनाथ के यूपी सीएम बनने के बाद खबरें आईं कि पूरे यूपी में बूचड़खानों और मीट की दुकानों को बंद किया जा रहा है। हालांकि यूपी की योगी सरकार ने इस तरह के कदम उठाने के लिए जिन कानूनों का सहारा लिया है वे वर्षों पुराने हैं। लेकिन, नगर निगम ने इन कानूनों को गंभीरता से लेने की जहमत नहीं उठाई। अब योगी इन्हीं कानूनों को लागू कर रही है। 
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अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर मुताबिक उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1959 के तहत, स्थानीय निकायों को शहर की सीमाओं के भीतर लोगों को ताजा और स्वच्छ मांस प्रदान करना अनिवार्य है। 

खबर के मुताबिक धारा 421 से 430 में बूचड़खानो, जानवरों की बिक्री और निजी बूचड़खानों के नियंत्रण के कामकाज के लिए नियम निर्धारित किए गए हैं।

गौरतलब है कि राज्य में ज्यादातर स्थापित बूचड़खाने और मांस की दुकानें लाइसेंस के बिना चल रही हैं। अब जब कानूनों को लोगू किया जा रहा है तो राज्य में मीट संकट दिखने लगा है।
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नगर पालिका परिषदों के अनुसार, प्रदेश में 140 बूचड़खाने और तकरीबन 50 हजार से ज्यादा मीट की दुकानें अवैध हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश के अधिकारियों को भी इसकी जानकारी है, लेकिन इस पर नियम संगत कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
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कोर्ट ने दिया था निर्देश

सीएम योगी आदित्यनाथ
लखनऊ की रिपोर्ट के मुताबिक, वहां 1000 से ज्यादा अवैध दुकानें चल रही थीं, जिसमें 200 को इस हफ्ते बंद करा दिया गया। वहीं, कुछ ने कार्रवाई होने के डर से बंद करा दिया गया। 

लक्ष्मी नारायण मोदी बनाम भारत सरकार केस में सुप्रीम कोर्ट ने साल 2012 में आदेश दिया कि सभी राज्य सरकारें को शहर में बूचड़खानों को जगह तय करनी है। इसके साथ ही उनका आधुनिकिकरण कराना है। साथ ही बूचड़खाने से निकले सॉलिड वेस्ट और प्रदूषण से बचने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। 
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