Yettinahole Project: कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने केंद्र सरकार से येतिनाहोले पेयजल परियोजना के लिए वन भूमि उपयोग की मंजूरी जल्द देने की मांग की। यह परियोजना सूखा प्रभावित दक्षिण कर्नाटक में पीने का पानी पहुंचाने के लिए है। मंजूरी मिलने पर इससे सात जिलों के 75 लाख लोगों को लाभ होगा और भूजल स्तर में सुधार आएगा।
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने मंगलवार को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। शिवकुमार ने उनसे येतिनाहोले परियोजना के तहत संशोधित वन भूमि परिवर्तन प्रस्ताव को जल्द प्रारंभिक मंजूरी देने का आग्रह किया। इस परियोजना का मकसद दक्षिण कर्नाटक के सूखा प्रभावित क्षेत्रों को पीने का पानी उपलब्ध कराना है।
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मुलाकात में शिवकुमार ने बताया कि राज्य सरकार ने चार जून को पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को 111.02 हेक्टेयर (जो पहले 173.31 हेक्टेयर था) वन भूमि परिवर्तन प्रस्ताव भेजा था। यह भूमि टुमकुरु और हासन जिलों में स्थित है और विश्वेश्वरैया जल निगम लिमिटेड को आवंटित की जानी है।
यह प्रस्ताव 24 जून को पर्यावरण और वन मंत्रालय की सलाहकार समिति ने देखा। इसके बाद 7 जुलाई को वन महानिरीक्षक ने कुछ जरूरी जानकारी मांगी। यह जानकारी मांगना मंजूरी लेने की प्रक्रिया का एक जरूरी हिस्सा है।
शिवकुमार ने केंद्रीय मंत्री से कहा, मांगे गए आवश्यक विवरणों का पालन किया जा रहा है और इसे मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। हम आपसे आग्रह करतरे हैं कि येतिनाहोले एकीकृत पेयजल योजना के लिए शीघ्र प्रारंभिक मंजूरी प्रदान करें।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना से सात जिलों में लगभग 75 लाख लोग को लाभ मिलेगा। इस योजना से 527 पानी के टैंक आधे भर जाएंगे। साथ ही भूजल की मात्रा भी बढ़ेगी।
शिवकुमार ने कर्नाटक भवन में राज्य जल संसाधन विभाग की कानूनी टीम से नदी परियोजनाओं से जुड़ी कानूनी विवादों पर भी चर्चा की। इस बैठक में राज्य के कृषि मंत्री एन चेलुवराया स्वामी और अतिरिक्त मुख्य सचिव गौरव गुप्ता भी मौजूद थे।