वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने यह भी कहा, यस बैंक के कर्मचारियों की नौकरी और उनका वेतन एक साल तक के लिए सुरक्षित रहेगा। वहीं, आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि संकट में फंसे यस बैंक का समाधान जल्द से जल्द निकाल लिया जाएगा। इसके लिए तय की गई 30 दिन की सीमा अधिकतम है।
यस बैंक पर लगा था एक करोड़ का जुर्माना
निर्मला सीतारमण ने कहा, ऐसा नहीं है कि यस बैंक का मसला अभी उठा है। 2017 से आरबीआई यस बैंक पर नजर रखे हुए था। 2018 में केंद्रीय बैंक ने यस बैंक में गड़बड़ी की पहचान कर ली थी, जबकि 2019 में यस बैंक पर एक करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। उन्होंने कहा, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने यस बैंक में दिलचस्पी दिखाई है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी बताया कि यस बैंक द्वारा नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था। बैंक ने जोखिम भरे क्रेडिट निर्णय लिए थे। मैंने पहले भी कहा है कि हम किसी भी संस्था को डूबने नहीं देंगे। 2014 के पहले से ही यस बैंक की ओर से ऐसी कंपनियों को लोन दिए गए थे, जिनकी वित्तीय हालत अच्छी नहीं थी।
यस बैंक ने अनिल अंबानी, एसेल ग्रुप, इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (आईएलएफएस), दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (डीएचएफएल) और वोडाफोन जैसी कंपनियों को लोन दिया जो डिफॉल्ट हुए हैं।
जिम्मेदार लोगों की होगी पहचान
उन्होंने कहा, मैंने आरबीआई से बैंक के इस संकट की वजह पता लगाने को कहा है। साथ ही समस्या के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार लोगों की पहचान करने को भी कहा है। नकदी संकट पर उन्होंने कहा, वह आरबीआई से बात करेंगी कि यस बैंक के जमाकर्ताओं को नकदी की समस्या का सामना न करना पडे़।
अब कोई बैंक डूबने की स्थिति में खाताधारक को 5 लाख रुपये तक की गारंटी मिलती है। संकटग्रस्त बैंकों के मामलों को देखते हुए सरकार ने हाल बजट, 2020-21 में यह अहम फैसला लिया था। इसका मतलब है कि बैंक में आपके 5 लाख रुपये तक बिल्कुल सुरक्षित रहेंगे। सरकार ने हाल में बैंकों में पैसा जमा कराने वालों के लिए बीमा कवर एक लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया है। बजट से पहले तक यह सीमा एक लाख रुपये थी।