अस्पताल के एक सूत्र ने बताया कि वह अब अपने देश लौट आए हैं और स्वस्थ हैं। उनका उपचार करने वाले एस्टर आरवी अस्पताल ने एक बयान में कहा कि यमन का नागरिक गोलीबारी में फंस गया था। वह अनजाने में युद्ध के शिकार बन गए थे और घायल हो गए थे। वह असहनीय पीड़ा के साथ जीवन जीने को मजबूर थे।
बयान के मुताबिक, गोली बायीं कनपटी की हड्डी में गहराई से धंसी हुई थी, जो महत्वपूर्ण संवहनी तंत्र के बहुत करीब थी। जिससे सर्जिकल चुनौती सामने आई। अस्पताल ने कहा कि डॉ. रोहित उदय प्रसाद के नेतृत्व में ईएनटी सर्जनों की टीम ने डॉ. विनायक कुर्ले के साथ मिलकर यमनी मरीज के कान से तीन सेंटीमीटर लंबी गोली सफलतापूर्वक निकाली। व्यक्ति 18 वर्षों से गोली के साथ रह रहा था।
अस्पताल ने कहा कि सर्जिकल टीम को गोली के स्थान के कारण स्पष्ट इमेजिंग हासिल करने में बाधाओं का सामना करना पड़ा। धातु की वस्तु सिर के अंदर होने के एमआरआई (मैग्नेटिक रिजोंनेस इमेजिंग) नहीं की गई। इसके अलावा, सीटी एंजियोग्राफी की गई ताकि गोली की पहचान की जा सके।