कर्नाटक में भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा की मुख्यमंत्री पद पर ताजपोशी की राह अब बहुत आसान नहीं है। भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व इस मामले में फूंक फूंक कर कदम रख रहा है। विपक्षी दलों की ओर से लगातार ऐसे आरोप लगाए जाते रहे हैं कि भाजपा ने हॉर्स ट्रेडिंग के जरिए कांग्रेस-जेडीएस की कुमारस्वामी सरकार गिराई है। यह बात केवल कर्नाटक ही नहीं, बल्कि उसके बाहर दूसरे राज्यों में भी गलत संदेश पहुंचा रही है। खासतौर पर, महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड में, जहां तीन-चार महीने में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके मद्देनजर भाजपा जल्दबाजी में ऐसा कोई भी फैसला नहीं लेना चाहती, जिसका गलत असर तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव पर पड़ता हो। दूसरी वजह, कद्दावर लिंगायत नेता बीएस येदियुरप्पा की उम्र भी बताई जा रही है। वे 76 साल के हो चुके हैं। भाजपा चाहती है कि वह खुद की बनाई उस नीति को न तोड़े, जिसमें 75 साल के बाद राजनेताओं को सक्रिय राजनीति से हटने की बात कही गई है।
बता दें कि पिछली बार भाजपा ने जल्दबाजी में निर्णय लेकर बीएस येदियुरप्पा की मुख्यमंत्री पद पर ताजपोशी करा दी थी। बाद में जब येदियुरप्पा की कुर्सी गई तो पार्टी की खूब किरकिरी हुई थी। भाजपा नेतृत्व अब वैसी गलती को दोहराने के पक्ष में नहीं है। कुमारस्वामी सरकार गिरने के बाद विधानसभा में भले ही बहुमत भाजपा के साथ है, लेकिन इसमें थोड़ा संशय है। भाजपा को सरकार बनाने के लिए 103 विधायक चाहिए। अगर 2 निर्दलियों को मिला लें तो भाजपा खेमें में 105 विधायक हो जाते हैं। अब इसका दूसरा पहलू देखिये। अगर बागी विधायकों में से आधे विधायक दोबारा से कांग्रेस के साथ आ खड़े हुए तो क्या होगा। इतना ही नहीं, उस स्थिति में यदि स्पीकर ने किन्हीं विधायकों के खिलाफ दलबदल कानून के तहत कार्रवाई कर दी तो विधानसभा में सारे समीकरण बदल जाएंगे। यही वजह है, कि बुधवार को मुख्यमंत्री पद के दावेदार येदियुरप्पा के नेतृत्व में होने वाली विधायकों की बैठक टाल दी गई। भाजपा सूत्रों का कहना है कि इस मामले में केंद्रीय नेतृत्व किसी भी तरह की जल्दबाजी नहीं दिखाना चाहता। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत की जा रही है। बागी विधायकों की स्थिति पर भी केंद्रीय नेतृत्व की नजर है। उनकी स्थिति जब तक पूरी तरह साफ नहीं हो जाती, तब तक कर्नाटक में भाजपा सरकार बनने की संभावना नजर नहीं आती।
बीएस येदियुरप्पा के पुत्र विजयेंद्रा येदियुरप्पा आज अमित शाह से मिल सकते हैं...
कर्नाटक भाजपा के कई बड़े नेता गुरुवार को दिल्ली पहुंच गए हैं। इनमें बीएस येदियुरप्पा के पुत्र विजयेंद्रा येदियुरप्पा भी शामिल हैं। वे भी अमित शाह से मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में सरकार के गठन से कहीं ज्यादा जोर कर्नाटक विधानसभा में स्पीकर रमेश कुमार के फैसले को लेकर होगा। स्पीकर का फैसला क्या हो सकता है, दूसरी बातों के अलावा इस पर खास चर्चा होगी। भाजपा नेताओं का कहना है कि स्पीकर बागी विधायकों का इस्तीफा मंजूर करें या फिर उनके खिलाफ दल बदल कानून के तहत करवाई करें। भाजपा चाहती है कि स्पीकर के इस फैसले से विधानसभा में बहुमत के आंकड़े की तस्वीर साफ हो जाएगी। उधर, स्पीकर रमेश कुमार ने अभी इस बाबत कोई फैसला नहीं दिया है। विधानसभा स्पीकर की चुप्पी भाजपा नेतृत्व ही नहीं, बल्कि येदियुरप्पा को भी परेशान करने वाली है।
येदियुरप्पा ने मंगलवार रात अमित शाह को लिखे अपने पत्र में क्या कहा था...
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को लिखे अपने पत्र में येदियुरप्पा ने कहा, 'मैं यह बताते हुए काफी खुशी महसूस कर रहा हूं कि मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की तरफ से पेश विश्वास मत में हमने उन्हें हरा दिया है। अब कर्नाटक में हमारी पार्टी की सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया है। इस वक्त 105 विधायक 'चट्टान' की तरह हमारे साथ खड़े हैं। येदियुरप्पा ने आगे लिखा, 'पिछले कुछ दिनों में विभिन्न राजनीतिक कारणों से हमारे लिए यह परीक्षा की घड़ी थी, लेकिन इन सभी चुनौतियों से पार हुए हमने विश्वास मत में उन्हें पराजित कर दिया है। पार्टी के सदस्यों से ज्यादा राज्य के लोगों ने राहत की सांस ली है, क्योंकि गठबंधन सरकार के खराब प्रशासन से से वे लोग ऊब चुके थे।
स्पीकर का फैसला पलट सकता है बाजी...
यदि स्पीकर रमेश कुमार ने बागी विधायकों को अयोग्य करार दिया तो तस्वीर बदल जाएगी। ऐसी स्थिति में बागी विधायकों को दोबारा से चुनाव लड़ना पड़ेगा। अगर उनकी विधायकी चली गई तो वे मंत्री कैसे बन पाएंगे। जैसा कि विपक्षी नेता शुरू से ही कहते आ रहे हैं कि यह सब खेल भाजपा की होर्स ट्रेडिंग का हिस्सा है। बागी विधायकों को मंत्री पद देने का लालच दिया गया है। यदि स्पीकर द्वारा बागी विधायकों का इस्तीफा स्वीकार कर लिया जाता है तो उन्हें भाजपा सरकार में ईनाम मिल सकता है। बुधवार को बीएस येदियुरप्पा का कहना था कि मेरे साथ संघ का आशीर्वाद है। विधायक भी हमारे साथ हैं। अब केवल मैं केंद्रीय नेतृत्व के इशारे का इंतजार कर रहा हूं।