भाजपा के लिंगायत बिरादरी के कद्दावर नेता और दक्षिण का चेहरा बीएस येदियुरप्पा से इस बार भी किस्मत ने आंख मिचौली खेली। राज्य का शीर्ष पद उन्हें तीन बार मिला, मगर तीनों ही बार येदियुरप्पा कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। पहली बार उन्हें सात दिन, दूसरी बार तीन साल दो महीने तो इस बार महज 55 घंटे के लिए ही उन्हें सीएम की कुर्सी नसीब हुई।
येदियुरप्पा को किस्मत से पहला धोखा वर्ष 2007 में मिला। दरअसल वर्ष 2006 में हुए चुनाव में किसी दल को बहुमत न मिलने के कारण भाजपा और जदएस के बीच बारी बारी से 20-20 महीने सीएम बनाने का फार्मूला तय हुआ। इस फार्मूले के तहत जदएस के कुमारस्वामी पहले 20 महीने सीएम बने, मगर जब येदियुरप्पा की बारी आई तो जदएस ने भाजपा से समर्थन वापस ले लिया। इस कारण येदियुरप्पा 12 नवंबर 2007 से 19 नवंबर को ही इस्तीफा देना पड़ा।
दूसरी बार येदियुरप्पा की किस्मत तब खुली जब वर्ष 2008 के चुनाव में भाजपा अपने दम पर सत्ता में आई। येदियुरप्पा फिर से मुख्यमंत्री बने। मगर खनन घोटाले में फंसने के कारण उनकी कुर्सी तीन साल दो महीने के बाद चली गई। अब इस साल येदियुरप्पा फिर सीएम की कुर्सी तक तो पहुंचे, मगर सीएम बनने के महज 55 घंटे बाद बहुमत हासिल न करने के कारण उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।