कई उपलब्धियों और चुनौतियों के साथ साल 2025 भी अपने अंतिम दिनों में पहुंच गया है। अब जब हम उम्मीदों भरी निगाह से साल 2026 का स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं, तो हमें इस बीत रहे साल के विवादों और मुद्दों पर भी एक नजर डालनी तो बनती है, जिन्होंने देश में खूब हंगामा मचाया और जनमानस के मन-मस्तिष्क को जमकर झकझोरा।
साल 2025 खत्म होने में अब कुछ ही दिन बचे हैं। यह साल विभिन्न अच्छी घटनाओं के साथ ही विवादों के लिए भी जाना जाएगा। इनमें राजनीतिक और आर्थिक दोनों ही विवाद शामिल हैं। इस साल के सबसे बड़े विवाद की बात करें तो वो ऑपरेशन सिंदूर ही होगा, जिसमें भारत और पाकिस्तान में संघर्ष हुआ और दोनों देश युद्ध के हालात में पहुंच गए थे। हालांकि पाकिस्तान ने जल्द ही घुटने टेक दिए और भारत संघर्ष विराम के लिए राजी हो गया। अन्य विवादों की बात करें तो उसमें अमेरिका के ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत समेत कई देशों पर लगाया गया भारी-भरकम टैरिफ और मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण के काम और उस पर राजनीतिक पार्टियों की नाराजगी एक बड़ा मुद्दा बना। तो आइए जानते हैं कि साल 2025 में कौन-कौन से विवाद ऐसे रहे, जिन्होंने देश को झकझोरा।
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इस साल का सबसे बड़ा सियासी मुद्दा रहा एसआईआर
बिहार विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले चुनाव आयोग ने वहां मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) करने का एलान किया। इसे लेकर देशभर में खूब हंगामा हुआ और विपक्ष ने इस पर कई कानूनी और वैधानिक सवाल भी उठाए। विपक्ष ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता को कटघरे में खड़ा किया और चुनाव आयोग पर सरकार के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर वोट चोरी करने का आरोप लगाया। हालांकि चुनाव आयोग और सरकार ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया और विपक्ष पर घुसपैठियों को शह देने का आरोप लगाया। बिहार में एसआईआर के तहत 65 लाख नाम हटाए गए। इसके बाद देश के 12 राज्यों में भी एसआईआर प्रक्रिया चल रही है, जिसमें ड्राफ्ट में करीब साढ़े तीन करोड़ नाम कट चुके हैं। चुनाव आयोग की तैयारी पूरे देश में एसआईआर कराने की है।
पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी
- फोटो : पीटीआई
पहलगाम आतंकी हमला और ऑपरेशन सिंदूर
22 अप्रैल 2025 को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में एक ऐसा आतंकी हमला हुआ, जहां लोगों का धर्म पूछकर उन्हें बर्बरता से मारा गया। जम्मू कश्मीर ने आतंकवाद का लंबा दौर देखा है, लेकिन वहां आमतौर पर पर्यटकों को निशाना नहीं बनाया जाता था। लेकिन पहलगाम के आतंकी हमले में निर्दोष नागरिकों को जिस बेरहमी से मारा गया, उसने हर भारतीय को गुस्से और गम से भर दिया। इस हमले में 26 लोगों की जान चली गई। यह साफ तौर पर देश में सांप्रदायिक हिंसा भड़काने और देश को हिंसा की आग में धकेलने की साजिश थी, लेकिन भारत के नागरिकों ने दिखा दिया कि देश में भाईचारे की जड़ें इतनी कमजोर नहीं हैं कि ऐसी साजिशें सफल हो जाएं।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई की और ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया और कई खूंखार आतंकियों को उनके घर में घुसकर मारा। भारत की प्रतिक्रिया लक्ष्य केंद्रित, नपी तुली थी और इसमें पाकिस्तान के आम नागरिकों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया। हालांकि पाकिस्तान ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला माना और भारत पर उकसावे की कार्रवाई के तहत हमले किए। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया। चार दिन चले इस संघर्ष में भारत के हमलों का पाकिस्तान के पास कोई जवाब नहीं था और आखिरकार उसने संघर्ष विराम की पेशकश की, जिसे भारत ने स्वीकार कर लिया।
waqf amendment act
- फोटो : पीटीआई
वक्फ संशोधन विधेयक पर गरमाया माहौल
इस साल वक्फ कानून, 1995 में सरकार ने कुछ बदलाव करते हुए वक्फ संशोधन विधेयक पेश किया, जिसे लेकर देश में खूब विवाद हुआ। इस बदलाव के विरोध में देश में मुस्लिम संगठनों ने कड़ी नाराजगी जताई और कई जगह इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी हुए। संशोधन के तहत वक्फ कानून में कलेक्टर को वक्फ संपत्तियों के सर्वेक्षण और स्वामित्व का निर्धारण करने का अधिकार दिया गया। साथ ही वक्फ बोर्ड में महिलाओं और गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति का भी प्रावधान किया गया। संपत्ति दान करने के लिए भी शर्तें लगाई गईं और सरकारी संपत्तियों को वक्फ संपत्ति के रूप में दावा करने पर भी प्रतिबंध लगाया गया। इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने संशोधन अधिनियम पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि वक्फ बोर्ड का सदस्य बनने के लिए पांच साल तक इस्लाम का पालन करने की शर्त हटा दी और राजस्व रिकॉर्ड के प्रावधान पर भी रोक लगा दी।
पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : ANI
मोदी-ट्रंप के रिश्ते और टैरिफ युद्ध
ये साल भारत-अमेरिका के संबंधों में आई खटास के लिए भी याद किया जाएगा। इससे पहले भारत और अमेरिका के संबंध लगातार मजूबत हो रहे थे। जॉर्ज डब्ल्यू बुश के कार्यकाल में भारत और अमेरिका के बीच हुए नागरिक परमाणु समझौते से भारत-अमेरिकी संबंधों का नया अध्याय शुरू हुआ था। फिर चाहे बराक ओबामा का कार्यकाल हो या फिर जो बाइडन का भारत-अमेरिकी संबंधों में लगातार बेहतरी देखी गई, लेकिन इस साल अपने दूसरे कार्यकाल में डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में आने के बाद से भारत और अमेरिका के संबंधों में थोड़ी खटास आई है।
पहले तो ट्रंप ने भारत पर सबसे ज्यादा टैरिफ वसूलने का आरोप लगाकर भारत पर भारी-भरकम टैरिफ लगाए। इसके बाद ऑपरेशन सिंदूर में भी ट्रंप ने पाकिस्तान को शह दी और पाकिस्तानी जनरल की पीठ थपथपाई। इसके बाद रूस से तेल खरीदने और यूक्रेन युद्ध को वित्तपोषित करने का आरोप लगाकर ट्रंप ने फिर से भारत पर टैरिफ लगा दिया। इस तरह अमेरिका ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया, जो दुनिया के देशों पर लगाए गए सबसे ज्यादा टैरिफ में से एक है। अब भारत के पास संयम बरतने के अलावा फिलहाल बहुत ज्यादा विकल्प नहीं हैं। ट्रंप की जैसी शख्सियत है कि वे कब क्या कर दें, उसे देखते हुए हम कह सकते हैं कि भारत-अमेरिकी संबंध बहुत अच्छी स्थिति में नहीं हैं।
उपराष्ट्रपति पद से जगदीप धनखड़ का इस्तीफा
इस साल भारतीय राजनीति में एक अभूतपूर्व घटना भी हुआ, जब जुलाई में अचानक से जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे की वजह जगदीप धनखड़ ने खराब स्वास्थ्य को बताया। हालांकि विपक्ष ने आरोप लगाया कि जगदीप धनखड़ से इस्तीफा लिया गया है। इस मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार पर खूब निशाना साधा। गौरतलब है कि इस्तीफा देने के बाद से जगदीप धनखड़ सार्वजनिक तौर पर लगभग नहीं के बराबर दिखाई देते हैं। हालांकि सीपी राधाकृष्णन के उपराष्ट्रपति पद की कमान संभालने के बाद से यह विवाद भी थम गया।
सीजेआई की ओर उछाला गया जूता
इस साल एक ऐसी घटना भी घटी, जिसमें देश के मुख्य न्यायाधीश की तरफ जूता उछाला गया। यह घटना 6 अक्तूबर को घटी, जब तत्कालीन सीजेआई जस्टिस बीआर गवई पर एक वकील ने जूता उछाल दिया। जूता सीजेआई को नहीं लगा और सीजेआई ने भी इस घटना को तूल नहीं दिया। हालांकि जूता उछालने वाले वकील राकेश किशोर के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की मांग हुई, लेकिन सीजेआई ने इससे इनकार कर दिया। लेकिन बाद में बार काउंसिल ने वकील का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया।
न्यायपालिका इस साल गलत कारणों से भी चर्चा में रही, जब दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के घर में आग लगने पर जली अवस्था में भारी-भरकम नकदी बरामद हुई। बाद में जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई शुरू हुई। इनके अलावा कई फैसले और न्यायपालिका की टिप्पणियां चर्चा और विवादों में बनी रहे।