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Year Ender 2024: कर्मियों ने सालभर लगाई गुहार, मगर राजी नहीं हुई सरकार; कब गठित होगा 8वां वेतन आयोग?

जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 30 Dec 2024 02:46 PM IST

सार

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार को वेतन आयोग का गठन, इसी वर्ष के प्रारंभ में कर देना चाहिए था। प्रतिभाशाली कर्मचारी अच्छा नेतृत्व और सुशासन प्रदान करने में सहायक होते हैं। भारत सरकार एक आदर्श नियोक्ता है, उसे अपने कर्मचारियों को आरामदायक जीवन प्रदान करने का ध्यान रखना चाहिए।
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Year Ender 2024 - फोटो : Amar Ujala


कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार को वेतन आयोग का गठन, इसी वर्ष के प्रारंभ में कर देना चाहिए था। प्रतिभाशाली कर्मचारी अच्छा नेतृत्व और सुशासन प्रदान करने में सहायक होते हैं। भारत सरकार एक आदर्श नियोक्ता है, उसे अपने कर्मचारियों को आरामदायक जीवन प्रदान करने का ध्यान रखना चाहिए। समय पर वेतन संशोधन का लाभ यह होता है कि वे केंद्र सरकार के कार्यक्रमों और नीतियों के कार्यान्वयन के लिए अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकेंगे। कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स के महासचिव एसबी यादव ने इस विषय में पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था। उन्होंने पीएम से आग्रह किया कि वर्तमान परिस्थितियों में बिना किसी विलंब के आठवें वेतन आयोग का गठन किया जाए। वेतनमान रिवाइज, 10 नहीं, बल्कि 5 साल में होना चाहिए। मुद्रास्फीति का स्तर बढ़ रहा है, ऐसे में दस साल का वर्तमान संशोधन कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए अनुकूल नहीं है। केंद्र सरकार के कर्मचारी, आठवें वेतन आयोग के गठन को लेकर 2023 से ही आवाज बुलंद कर रहे हैं। संसद में भी वेतन आयोग के गठन का मुद्दा उठ चुका है। शीतकालीन सत्र में भी सांसदों ने यह मुद्दा उठाया था। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि फिलहाल वेतन आयोग के गठन का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। 


कॉन्फेडरेशन ने अपने पत्र में लिखा था, हमारा संगठन केंद्र सरकार के कर्मचारियों और श्रमिकों का एक बड़ा परिसंघ है। विभिन्न महकमों के 7 लाख कर्मचारी इस संगठन से जुड़े हैं। इसके अलावा कर्मचारियों और श्रमिकों के 130 संगठन, परिसंघ के सहयोगी हैं। मौजूदा समय में डीए पात्रता का प्रतिशत 53% से अधिक हो गया। पिछले नौ वर्षों के दौरान मजदूरी के वास्तविक मूल्य में बहुत अधिक गिरावट आई है। खासतौर से कोविड-19 के बाद सरकारी कर्मियों को विपरित स्थितियों में काम करना पड़ा है। हमारे देश की सर्वश्रेष्ठ प्रतिभा को आकर्षित करने के लिए केंद्र सरकार के कर्मचारियों की वेतन संरचना इतनी मजबूत होनी चाहिए कि इसे हर पांच साल में संशोधित किया जाना चाहिए। 


यादव ने बताया, उन्होंने पीएम मोदी को लिखे पत्र में यह अनुरोध किया था कि अब 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का बिना किसी देरी के गठन किया जाए। उच्च मुद्रास्फीति के स्तर और धन मूल्य में गिरावट के कारण यह आवश्यक हो गया है। समय पर वेतनमान संशोधन से केंद्र सरकार के कर्मचारी और पेंशनभोगी एक सभ्य जीवन जी सकेंगे। केंद्र सरकार के कार्यक्रमों और नीतियों को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करना, आम आदमी तक उनका लाभ पहुंच सके, इन सबके लिए कर्मियों को बेहतर ढंग से काम करने की प्रेरणा मिलेगी। केंद्र सरकार में अंतिम बार 1/1/2016 को वेतनमान संशोधित किया गया था। महामारी की स्थिति (कोविड) के बाद विनिर्माण उद्योग, निर्माण, स्वास्थ्य, सेवा क्षेत्र आदि सहित आवश्यक वस्तुओं और गैर-आवश्यक वस्तुओं की कीमतें कई गुना बढ़ गई हैं। उच्च ब्याज दरें भी कर्मचारियों/पेंशनभोगियों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं। 


मुद्रास्फीति चरम पर है। उच्च मुद्रास्फीति दर के कारण पिछले 9 वर्षों में वास्तविक धन मूल्य काफी कम हो गया है। 1.7.2024 तक, डीए पात्रता का प्रतिशत 53% से अधिक हो गया है। पिछले 9 वर्षों के दौरान मजदूरी के मूल्य में भारी गिरावट आई है। किसी भी वेतन संरचना की निवास अवधि 5 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए, विशेष रूप से इस पृष्ठभूमि में कि अधिकांश सार्वजनिक उपक्रमों में वेतन संशोधन 5 वर्ष के अंतराल पर होता है। इसी तरह, बैंक कर्मचारियों का वेतन संशोधन हर 5 साल में होता है। 


प्रति व्यक्ति मासिक घरेलू उपभोग व्यय 2011-12 से 2022-23 के दौरान दोगुना से अधिक हो गया है। यह डेटा एनएसएसओ द्वारा प्रकाशित किया गया था। इससे पता चलता है कि महंगाई के कारण हमारा खर्च भी दोगुना हो गया है, लेकिन पिछले दशक से हमारी मजदूरी उस हिसाब से नहीं बढ़ी है। भारतीय अर्थव्यवस्था में लगातार सुधार हो रहा है। आईएमएफ के अनुमान के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था 2027 तक जापान और जर्मनी को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगी। जीडीपी 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर को पार कर सकती है। केंद्र सरकार की भुगतान क्षमता अच्छी है। केंद्र सरकार के विभागों के लाभ और हानि को ध्यान में नहीं रखा जाना चाहिए, क्योंकि केंद्र सरकार की सामाजिक जिम्मेदारी रक्षा, डाक, सड़क, रेलवे, पानी, भोजन, स्वास्थ्य, सर्वेक्षण विभाग आदि जैसी सामाजिक सेवाएं प्रदान करना है। 7वें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों में  कहा गया है कि कर्मचारियों की वेतन संरचना को व्यवहार्य बनाए रखने के लिए उनके वेतन ढांचे में सुधार करना आवश्यक है। 


वेतन संरचना में मुद्रास्फीति के परिणामस्वरूप परिलब्धियों के वास्तविक मूल्य में किसी भी महत्वपूर्ण गिरावट को संबोधित करने की आवश्यकता होनी चाहिए। व्यक्ति को उसकी योग्यता का उचित एवं पर्याप्त मुआवजा मिलना चाहिए। वेतन संरचना में वृद्धि बाजार की ताकतों के साथ तालमेल नहीं बिठा सकती, साथ ही यह इतनी अनाकर्षक भी नहीं होनी चाहिए कि प्रतिभा सरकारी सेवा की ओर आकर्षित न हो। सरकारी सेवा कोई अनुबंध नहीं है। यह एक स्थिति है। कर्मचारियों को केंद्र सरकार से उचित व्यवहार की उम्मीद है। राज्यों को सेवाओं के लिए एक रोल मॉडल की भूमिका निभानी चाहिए। इससे कर्मचारी उत्साह के साथ कार्य करते हैं। 
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यादव के मुताबिक, इस संबंध में, भूपेन्द्र नाथ हजारिका और अन्य बनाम असम राज्य और अन्य (2013 (2) धारा 516 में रिपोर्ट) के मामले में टिप्पणियों को उद्धृत करना उपयोगी होगा, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है: यह हमेशा ध्यान में रखना चाहिए कि कर्मचारियों की वैध आकांक्षाओं को दोषी नहीं ठहराया जाए और ऐसी स्थिति न बनाई जाए, जहां उम्मीदें निराशा में समाप्त हो जाएं। हर किसी के लिए आशा बेहद कीमती है और एक आदर्श नियोक्ता को अपनी वरिष्ठता के साथ शतरंज का खेल खेलकर इसे धोखेबाज और विश्वासघाती में नहीं बदलना चाहिए। हर कदम पर शांत संवेदनशीलता और चिंतित ईमानदारी की भावना झलकनी चाहिए। विश्वास का माहौल कायम करना होगा। जब कर्मचारी पूरी तरह से आश्वस्त होंगे कि उनके विश्वास के साथ विश्वासघात नहीं किया जाएगा और उनके साथ सम्मानजनक निष्पक्षता का व्यवहार किया जाएगा, तभी सुशासन की अवधारणा को मूर्त रूप दिया जा सकता है।


स्टाफ साइड की राष्ट्रीय परिषद (जेसीएम) के सदस्य और अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ) के महासचिव सी.श्रीकुमार का कहना है, कर्मियों के डीए का आंकड़ा अब 53 प्रतिशत हो गया है। अब पहली जनवरी से इसमें तीन चार प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में केंद्र सरकार को अविलंब 8वां वेतन आयोग गठित करना चाहिए। अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा के मुताबिक, आठवें वेतन आयोग का गठन न होने से देशभर के दो करोड़ सरकारी कर्मचारियों एवं पेंशनरों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। कर्मचारी संगठनों ने केंद्र सरकार द्वारा आठवां वेतन आयोग गठित न करने के फैसले को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। 'भारत पेंशनर समाज' ने भी 8वें वेतन आयोग के गठन की मांग उठाई है। 

इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर एसोसिएशन ने भी केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से आग्रह किया था कि केंद्र सरकार को बिना किसी देरी के आठवें वेतन आयोग का गठन करना चाहिए। ऑल इंडिया एनपीएस एम्पलाइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ मंजीत सिंह पटेल ने कहा, देश भर के करोड़ों कर्मचारियों की मांग है कि आठवें वेतन आयोग का गठन तुरंत प्रभाव से किया जाए। सरकार के एजेंडे में आठवां वेतन आयोग गठित करने की कोई योजना नहीं है। 


वित्त राज्य मंत्री के इस बयान से कि सरकार, आठवें वेतन आयोग के गठन पर विचार नहीं कर रही है, इससे केन्द्रीय एवं राज्य कर्मियों एवं पेंशनर्स को तगड़ा झटका लगा है। उनमें आक्रोश व्याप्त है। वेतन आयोग से देश के कर्मचारियों एवं पेंशनर्स को उनके वेतन, पेंशन और भत्तों में कुछ बढ़ोतरी होने की उम्मीद बनी रहती है। केन्द्रीय कर्मचारियों, सशस्त्र बलों और राज्य सरकार के कर्मियों पर आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों को जनवरी 2026 से लागू किया जाना प्रस्तावित है। अब इसमें एक साल का समय ही बचा है। ऐसे में सरकार को बिना किसी देरी के आठवें वेतन आयोग का गठन करना चाहिए।

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