पत्रकार भाषा सिंह ने कहा कि इस ऐतिहासिक आंदोलन ने देश के दो बड़े कॉरपोरेट घराने का चैन छीन लिया है। ये आंदोलन लोकतंत्र के खंभे को चैलेंज कर रहा है। ये पहला आंदोलन है जिसमें मीडिया पर हमला हुआ। लोकतंत्र कैसे बचेगा ये आंदेालन ने हमें सिखाया है। इस आंदोलन ने ये भी बताया कि कृषि में महिला किसानों की क्या भागदीरी है।
आंदोलन में शामिल महिलाएं खेती किसानी के अलावा बिजली, इकोनाॅमी और राजनीति पर चर्चा कर रही है। महिलाओं और युवाओं ने नया नैरेटिव सेट कर दिखाया है। आज किसान विपक्षी दलों से भी सवाल कर रहे हैं कि इस महत्वपूर्ण मसले पर कोई सर्वदलीय बैठक क्यों नहीं हो रही है। किसान नेताओं का आरोप है कि सरकार हमारे इस पूरे मूवमेंट को साजिश में तब्दील करने की सोच रही है।
वरिष्ठ वकील अशोक पांडा का कहना था कि सरकार को अपनी जिद छोड़कर किसानों से उनके मुद्दों पर खुलकर बात करनी चाहिए। किसानों की सभी मांगों को माननी चाहिए। इसके अलावा स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों को लागू करना चाहिए। इससे पूरे देश के किसानों के साथ न्याय हो सकेगा।
किसान दिल्ली वालों का दर्द समझते हैं, लेकिन मजबूर हैं
कार्यक्रम में राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ मध्यप्रदेश के अध्यक्ष राहुल राज ने कहा कि किसान कृषि सुधारों के विरोध में नहीं है। लेकिन ऐसे सुधार नहीं हो जो किसानों को ही बर्बाद कर दे। आज दिल्ली की जनता को जो दर्द हो रहा है वह हम लोग भी समझते हैं। इसलिए हम लोग शांति से बैठकर अपना आंदोलन कर रहे हैं।
हमारी मांगे बुनियादी हैं लेकिन सरकार इसे मानने को ही तैयार नहीं है। आज हम किसानों के साथ आम उपभोक्ताओं की भी लड़ाई लड़ रहे हैं। लेकिन आज तक सरकार हमारी पीड़ा सुनने को तैयार नहीं हुई। आज सरकार हमें पूरी तरह से बदनाम करने में लगी हुई है। 26 जनवरी के दिन हम परेड़ में कोई व्यवधान नहीं डालेंगे। सभी किसान दिल्ली के आउंटर रिंगरोड पर ट्रैक्टर मार्च निकालेंगे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता और संचालन करते हुए वरिष्ठ पत्रकार और चिंतक एन आर मोहंथी ने किसान आंदोलन के प्रति सरकार के रवैये पर तीखी टिप्पणी की और 1988 की याद दिलाते हुए कहा कि तब बोट क्लब पर किसानों की विशाल रैली हुई थी और तत्कालीन सरकार ने इसे नहीं रोका था, लेकिन आज 'भारी बहुमत वाली' सरकार किसानों को दिल्ली में घुसने की इजाजत तक नही दे रही है।
लोकतंत्र का आज मजाक बन गया है। किसानों ने अपने शांतिपूर्ण आंदोलन से साबित कर दिया है कि देश की जनता इस सरकार की जनविरोधी रवैये को किसी भी हालत में मंजूर नहीं कर सकती। जेपी फाउंडेशन की ओर से धन्यवाद ज्ञापन करते हुए शशि शेखर ने कहा कि आज किसानों के आंदोलन को देखकर जेपी आंदोलन की याद ताजा हो गई है।