चक्रवात ताउते के बाद अब 'यास' तूफान तबाही मचाना शुरू कर दिया है। मौसम विभाग 'यास' तूफान को लेकर अलर्ट जारी किया है।मौसम वैज्ञानिक 'यास' को भी बेहद खतरनाक तूफान मान रहे हैं। इस चक्रवाती तूफान का असर अंडमान निकोबार द्वीप समूह, ओडिशा और पश्चिम बंगाल और बिहार पर होगा। चक्रवाती तूफान यास से ओडिशा के भद्रक और बालासोर में सबसे ज्यादा तबाही की आशंका है ।
मौसम विभाग की मानें तो भीषण चक्रवाती तूफान ओडिशा एवं पश्चिम बंगाल में पारादीप और धामरा से होकर गुजरेगा। मौसम विभाग ने बताया कि यास तूफान के दौरान हवाओं की रफ्तार 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। मौसम विभाग ने यह भी बताया कि यह तूफान 2019 में आए अम्फान की तरह होगा।
इन राज्यों में बारिश शुरू
ओडिशा, बंगाल समेत अन्य हिस्सों में बारिश शुरू हो गई है। झारखंड में आज और कल भारी से भारी बारिश हो सकती है। बिहार, सब हिमालयन पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी आज और कल भारी से भारी बारिश हो की आशंका है। असम मेघालय में भी आज आइसोलेटेड भारी बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा, 'तूफान बालेश्वर के दक्षिण में ओडिशा तट को पार कर रहा है। हवा की गति 130-140 किलोमीटर प्रति घंटे है। लैंडफॉल प्रक्रिया अभी चल रही है जो कुछ घंटों में पूरी होगी साथ ही मछुआरों से समंदर में नहीं जाने को कहा है। आईएमडी ने बताया कि ओडिशा के, जगतसिंहपुर, केंद्रपाड़ा, जाजपुर, भद्रक, बालासोर, मयूरभंज, कटक, ढेंकनाल, क्योंझरगढ़ में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है, जबकि पश्चिम बंगाल के बांकुरा, दक्षिण 24 परगना , झारग्राम और पुरुलिया में अलग-अलग हिस्सों पर भारी बारिश की आशंका है।
यास का मतलब होता है 'निराशा'
दरअसल, 'यास' एक अरेबिक शब्द है जिसका अर्थ है 'निराशा'। ओमान देश ने इस तूफान को ये नाम दिया है। क्योंकि यह तूफान ओमान की तरफ से आया है। इससे बंगाल और ओडिशा, लक्ष्यद्वीप समेत आसपास के इलाकों में भारी बारिश की आशंका है।
तूफानों का नामकरण कैसे होता है
दुनिया में तूफानों का नामाकरण होने की परंपरा है। जिस देश में चक्रवात उठता है करीब-करीब उसी देश के नाम पर तूफानों का नामाकरण होता है। तूफाने के नामकरण की शुरुआत अटलांटिक क्षेत्र में 1953 में हुई एक संधि से की गई थी। जबकि हिंद महासागर क्षेत्र में यह व्यवस्था साल 2004 से शुरू हुई। किसी भी साइक्लोन के नामकरण के लिए सदस्य देश अपनी ओर से नामों की सूची देते हैं। इसके बाद उनकी अल्फाबेटिकल लिस्टिंग की जाती है। हर बार अलग-अलग देशों का नंबर आता है और इसी क्रम में जिस देश ने जो नाम दिया है उसी देश के द्वारा दिए गए नाम पर पड़ता है।
भारत की पहल पर हुई थी नामाकरण की शुरुआत
हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की पहल पर 8 देशों ने तूफानों के नामकरण की शुरुआत हुई। आठ देशों में पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, मालदीव, म्यांमार, ओमान और शाईलैंड शामिल हैं। साल 2018 में इसमें यूएई, ईरान, कतर और यमन देश भी जुड़ गए।