चीन और अमेरिका के बीच एआई की रेस में कौन कितना आगे?
गौर करने वाली बात ये है कि चीने ने अभी तक एआई के क्षेत्र में अमेरिका की बराबरी नहीं की है। अमेरिका की सबसे बड़ी बढ़त उसके फ्रंटियर एआई मॉडल हैं। ये ऐसे एडवांस्ड और शक्तिशाली एआई सिस्टम हैं, जिन्हें अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियां विकसित कर रही हैं। इस क्षेत्र में अमेरिकी कंपनियों की स्थिति अभी भी मजबूत है। लेकिन चीन तेजी से अपनी दूसरी ताकत तैयार कर रहा है। चीनी कंपनियां ओपन एआई मॉडल विकसित कर रही हैं और अमेरिका के प्रतिबंधों के बाद भी चीन ने अमेरिका की एडवांस्ड चिप्स की तुलना में कमजोर या पुराने घरेलू हार्डवेयर (जैसे Huawei चिप्स) पर भी भारी-भरकम मॉडल्स को चलाने की महारत हासिल कर ली है।
इससे भविष्य में चीन की विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने की क्षमता बढ़ सकती है। इसी वजह से कुछ विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका और चीन के बीच फ्रंटियर एआई का अंतर कुछ कम हुआ है। स्टैनफॉर्ड 2026 एआई इंडेक्स रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के सबसे बेहतरीन अमेरिकी और चीनी एआई मॉडल्स के बीच परफॉर्मेंस का अंतर घटकर सिर्फ 2.7 फीसदी रह गया है। हालांकि, इस बात का ध्यान रखें कि यह रिपोर्ट अप्रैल महीने में प्रकाशित हुई थी।
एडवांस्ड एआई चिप की रेस में अमेरिका की है बादशाहत
आपको इस बारे में भी जानने की जरूरत है कि एआई की दौड़ में अमेरिका और चीन की ताकत एक जैसी नहीं है। Fudan University के Yao Xu इस बारे में समझाते हुए कहते हैं कि अमेरिका के पास एडवांस्ड चिप्स हैं, जबकि चीन के पास बेहतर योजना और उसे बड़े स्तर पर लागू करने की क्षमता है। हालांकि, एडवांस्ड चिप्स की कमी चीन के लिए एक बड़ी चुनौती है। अमेरिका की ताकत सिर्फ एआई मॉडल बनाने तक सीमित नहीं है। उसके पास दुनिया की सबसे एडवांस्ड एआई चिप्स, पावरफुल कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी चेन है। यहां उसकी सबसे बड़ी बढ़त है।
दूसरी तरफ चीन की बड़ी ताकत उसकी इंडस्ट्रियल प्लानिंग, सरकारी नीतियों के बीच तालमेल और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता है। चीन किसी टेक्नोलॉजी को बड़े पैमाने पर अपनाने और उसे अपने उद्योगों में तेजी से इस्तेमाल करने की क्षमता रखता है। हालांकि, यहां एक बड़ी अड़चन है सबसे एडवांस्ड एआई चिप्स तक पहुंच। यही वह क्षेत्र है जहां चीन अभी भी अमेरिका और उसके सहयोगियों की तकनीकी बढ़त को चुनौती देने की कोशिश में लगा हुआ है।
Goldman Sachs की एक रिसर्च की मानें तो चीन अगले एक दशक में एडवांस्ड चिप्स के मामले में अपनी विदेशी निर्भरता काफी कम कर सकता है। 7 नैनोमीटर और उससे छोटे चिप्स की घरेलू उत्पादन क्षमता 2025 से 2035 के बीच सालाना करीब 46 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। इससे घरेलू सप्लाई और मांग के बीच का अंतर 92 प्रतिशत से घटकर 34 प्रतिशत तक हो सकता है। हालांकि, चीन की सबसे बड़ी कमजोरी अभी भी लिथोग्राफी तकनीक है।
एआई की रेस में ऊर्जा की भी है बड़ी भूमिका
एआई की इस रेस में ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्थान है। अमेरिका के पास भले ही आज बड़े पैमाने पर एआई कंप्यूटिंग के लिए मजबूत क्षमता है, लेकिन आगे चलकर उसके सामने ऊर्जा की चुनौती आ सकती है। वजह है तेजी से बढ़ते डाटा सेंटर, जिन्हें चलाने के लिए बहुत बड़ी मात्रा में बिजली चाहिए। इससे स्थानीय पावर ग्रिड पर दबाव बढ़ सकता है। चीन की स्थिति यहां कुछ अलग है। उसके पास अमेरिका की तुलना में ज्यादा स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता है। यानी एआई के लिए सिर्फ चिप्स और डाटा सेंटर ही जरूरी नहीं हैं, उन्हें लगातार चलाने के लिए पर्याप्त बिजली भी चाहिए। आने वाले वर्षों में यही ऊर्जा क्षमता एआई की दौड़ में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक फायदा बन सकती है।