सोशल मीडिया मंच एक्स पर मौजूद एआई टूल 'ग्रोक' विवादित कंटेंट से जुड़ा विवाद गहराता जा रहा है। एक तरफ जहां एक्स ने कर्नाटक हाईकोर्ट में भारत सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। वहीं सरकारी सूत्रों का कहना है कि, ग्राोक के सभी विवादित कंटेंट के लिए एक्स ही जिम्मेदार है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टूल ग्रोक की तरफ से बनाए गए सभी कंटेंट के लिए जिम्मेदार हो सकता है। एक सरकारी सूत्र के अनुसार, इस मामले पर जल्द ही कानूनी राय तय की जाएगी। हाल ही में, कुछ उपयोगकर्ताओं ने एक्स पर भारतीय नेताओं से जुड़े सवाल ग्रोक से पूछे, जिनके जवाब कई बार विवादास्पद पाए गए। सूत्र ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स से इस बारे में बातचीत कर रहा है ताकि इसके काम करने के तरीके को समझा और आंका जा सके।
विज्ञापन
IT मंत्रालय ने ग्रोक-एक्स को नहीं भेजा कोई नोटिस
इस बीच, सरकारी सूत्रों ने दावा किया कि एक्स या ग्रोक को लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने बड़ी जानकारी दी है। मंत्रालय ने कहा है कि उसने ग्रोक या एक्स को कोई नोटिस नहीं भेजा है। मंत्रालय एक्स और ग्रोक के साथ बातचीत कर रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारी एक्स के अधिकारियों से बातचीत कर रहे हैं और जांच कर रहे हैं कि किस स्तर पर भारतीय कानून का उल्लंघन किया गया है।
सरकार की सख्ती और पुराने मामले
पिछले साल, गूगल के एआई टूल जेमिनी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी थी, जिसके बाद सरकार ने तुरंत कार्रवाई की और एआई कंटेंट पर नए दिशा-निर्देश जारी किए। सरकारी सूत्र ने बताया कि सोशल मीडिया पर कंटेंट को लेकर पहले से गाइडलाइंस लागू हैं और कंपनियों को उनका पालन करना जरूरी है।
एक्स बनाम भारत सरकार- कोर्ट में मामला
इससे पहले आज ग्रोक एआई के स्वामित्व वाली कंपनी एक्स ने आईटी एक्ट की धारा 79(3) को लेकर कर्नाटक हाईकोर्ट में भारत सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। कंपनी का कहना है कि सरकार इस धारा का इस्तेमाल मनमाने तरीके से कंटेंट ब्लॉक करने के लिए कर रही है, जो सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ है। एक्स की तरफ से दावा किया गया है कि धारा 69ए के तहत ही किसी कंटेंट को ब्लॉक किया जाना चाहिए, लेकिन सरकार एक समानांतर सिस्टम बना रही है, जो कानून के खिलाफ है।
धारा 79: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी
आईटी एक्ट की धारा 79(1) सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को उनके यूजर्स की तरफ से पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए सुरक्षा देती है। लेकिन धारा 79(3) के तहत, अगर कोई प्लेटफॉर्म सरकार के आदेशों के बावजूद आपत्तिजनक कंटेंट नहीं हटाता, तो उसे कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। अगर कोई प्लेटफॉर्म 36 घंटे के भीतर कंटेंट नहीं हटाता, तो उसे 'सेफ हार्बर' सुरक्षा खोने का खतरा होता है और आईपीसी समेत अन्य कानूनों के तहत मुकदमा चल सकता है।