भारत विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के व्यापार विवाद निपटान समिति के उस फैसले को चुनौती देगा जिसमें कहा गया है कि कुछ सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) उत्पादों पर देश का आयात शुल्क वैश्विक व्यापार के नियमों का उल्लंघन करता है। वाणिज्य मंत्रालय के सूत्रों ने यह जानकारी दी।
वाणिज्य मंत्रालय के सूत्रों ने सोमवार को कहा कि भारत डब्ल्यूटीओ समिति के फैसले को डब्ल्यूटीओ की अपीलीय संस्था में चुनौती देगा, जो इस तरह के व्यापार विवाद का समाधान करने वाली सर्वोच्च संस्था है। सूत्रों ने यह भी कहा कि इस फैसले का घरेलू उद्योग पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
यूरोपीय संघ, जापान और ताइवान ने खड़ा किया विवाद
जिनेवा स्थित डब्ल्यूटीओ के विवाद निपटान ‘पैनल’ ने सोमवार को कहा कि कुछ सूचना और संचार प्रौद्योगिकी उत्पादों पर भारत द्वारा लगाये गए आयात शुल्क वैश्विक व्यापार नियमों का उल्लंघन करते हैं। इन शुल्कों के खिलाफ डब्ल्यूटीओ में यूरोपीय संघ, जापान और ताइवान द्वारा एक विवाद दायर किए जाने के बाद यह फैसला आया है।
भारत ने मोबाइल फोन और उसके उपकरणों, बेस स्टेशन, एकीकृत सर्किट और ऑप्टिकल उपकरणों समेत कई तरह के आईसीटी उत्पादों पर आयात शुक्ल लगाया था। यह शुल्क 7.5 प्रतिशत से 20 प्रतिशत के बीच था। भारत के इस फैसले को यूरोपीय संघ (ईयू) ने 2 अप्रैल, 2019 को डब्ल्यूटीओ में चुनौती दी थी। बाद में ताइवान और जापान भी इस विवाद में शामिल हो गए थे।
यूरोपीय संघ ने दावा किया था कि भारत की ओर से लगाए गए ये शुल्क विश्व व्यापार संगठन के कुछ प्रावधानों के साथ असंगत प्रतीत होते हैं। 17 अप्रैल 2019 को सिंगापुर और चीनी ताइपे ने परामर्श के लिए शामिल होने का अनुरोध किया। 18 अप्रैल 2019 को कनाडा, जापान, थाईलैंड और अमेरिका ने परामर्श बैठक में शामिल होने का अनुरोध किया। इसके बाद 19 अप्रैल 2019 को चीन ने अनुरोध किया।
व्यापार विवाद निपटान समिति के निष्कर्षों में यूरोपीय संघ के दावों के संबंध में कहा गया है कि भारत के कुछ आईसीटी उत्पादों पर लगाए गए शुल्क 1994 के सामान्य समझौते के कुछ प्रावधानों के खिलाफ हैं, हम पाते हैं कि भारत के कुछ उत्पादों शुल्क असंगत है।
विश्व व्यापार संगठन के विवाद निपटान तंत्र के तहत एक व्यापार विवाद के समाधान की प्रक्रिया के अनुसार, मामला दर्ज करने के बाद दोनों व्यापारिक साझेदार इस मुद्दे के समाधान के लिए परामर्श बैठक में शामिल होंगे। यदि दोनों पक्ष ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो शिकायतकर्ता विश्व व्यापार संगठन से विवाद को सुलझाने के लिए एक विवाद समिति स्थापित करने के लिए कह सकता है।
यूरोपीय संघ के अनुसार, समिति के फैसले में विश्व व्यापार संगठन ने भारत के खिलाफ यूरोपीय संघ के सभी दावों को बरकरार रखा और पाया कि कुछ आईसीटी उत्पादों, जैसे कि मोबाइल फोन पर भारत का 20 प्रतिशत तक का शुल्क उसकी विश्व व्यापार संगठन की प्रतिबद्धताओं के अनुरूप नहीं था और इस प्रकार यह अवैध है।