रीढ़ की हड्डी में गंभीर बीमारी से पीड़ित एक व्यक्ति ने राष्ट्रपति व राज्यपाल को पत्र भेजकर इच्छा मृत्यु की मांग की है। वह पिछले तीन सालों से बिस्तर पर पड़ा है और चलने फिरने में पूरी तरह से लाचार है। गरीबी के कारण अब महंगे इलाज कराने में भी दिक्कत आ रही है। तहसील क्षेत्र के जमौता गांव निवासी कल्लू (40) हैंडपंप गाड़ने का काम करता है।
इससे मिलने वाली मजदूरी से वह अपनी पत्नी व चार बच्चों का पेट पाल रहा है। तीन साल पहले अचानक कल्लू की पीठ में तेज दर्द हुआ, जिसके बाद वह स्थानीय डॉक्टरों से इलाज कराने लगा। हालत ठीक होने के बजाय और बिगड़ने लगी और कामकाज भी छूट गया। पत्नी ने इलाज के लिए अपने जेवर तक बेंच डाले लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ।
गांववालों ने इलाज के लिए पैसा इकट्ठा किया और उसे इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज लखनऊ भेजा। बावजूद इसके स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। धीरे-धीरे परिवार वालों के साथ मददगारों ने भी हाथ खींच लिया। एक सप्ताह पहले मेडिकल कालेज में जांच के बाद कल्लू को वहां से रेफर कर लखनऊ के ही आईकान हॉस्पिटल में इलाज करवाने की सलाह दी गई।
जिसके बाद उसकी पत्नी सुनीता बेबस हो गई और कल्लू ने अपने परिवार के लोगों की परेशानी को देखते हुए अब राष्ट्रपति और राज्यपाल को पत्र भेजकर इच्छा मृत्यु की मांग की है। इस संबंध में डुमरियागंज एसडीएम विनय कुमार पाठक ने बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है। वह हलका लेखपाल से इसकी जानकारी करवाते हैं। अगर कल्लू वास्तव में गरीब है, तो उसे इलाज के लिए सरकारी मदद दिलाई जाएगी।